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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Saturday, December 14, 2024

क़ातिल

तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया
बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया
ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं
न कैद ही किया मुझको न ही रियाह किया
[अदीम = Unique, आगाह = Warn, रियाह = Set free]

शराब रात कि बूंदों से बारहाती रही
तो जाम ने भी उसे मन्ज़रे गुलाब किया
[बारहाती = Again and Again = Multiple Occurrence]

न गिन सका है कोई भी दिए ये ज़ख्म तेरे
न जाने कितनों ने आकर यही हिसाब किया

ये तार तार से दिल में जो साँस बच के रही
उसे भी हैरते 'ज़ाहिर' ने है मज़ार किया

ये क्या मज़ाह किया है नसीब ने मुझसे
के मैंने अपने ही क़ातिल से रस्मो राह किया
[मज़ाह = Joke, रस्मो राह = Contact/Relation]

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...