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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Wednesday, February 5, 2025

टहनी

बात कहने को बात कहनी थी
जो अनकही थी दिल में रहनी थी

बोझ कैसे उतरता दिल का भला
दिल कि बातें न थी वो ज़हनी थी

गिर गई वो चलो अच्छा ही हुआ
वो इमारत कभी तो ढहनी थी

ख़ुद को अब भी मेरा बताने को
उसने मेरी ही शाल पहनी थी

जाने कैसे हुआ पलट क्यूँ गई
जो हवा मेरी ओर बहनी थी

उससे वा बस्त होके 'ज़ाहिर' था
तंज़ ओ फ़िक्रों की बात सहनी थी

फूल तूफ़ान आ के लेके गया
बच गई सिर्फ़ एक टहनी थी

Sunday, February 2, 2025

देखा

उसके जाने का ये असर देखा
आज वीरान अपना घर देखा
डूबता ही चला गया, जब से 
उसकी आँखों में अपना दर देखा 

उसकी महफ़िल में पारा पारा थे
उसकी मुझपर ही थी नज़र, देखा?

अक्स आईने में मेरा जो दिखा
उसने फिर ख़ुद को देखकर देखा

बात आगे न की के मैंने तुझे  
बात करता अगर मगर देखा 

मैं तो बिलकुल से उसका पूरा था 
उसने तो बस मेरा हो कर देखा 

मैं उजड़ के बिखर न जाऊँ कहीं
उसकी आँखों में मैंने डर देखा

शौक़ 'ज़ाहिर' था लौट कर देखूँ
हूक का मैंने फिर भँवर देखा

उससे मिलना था ख़ाब मेरे लिये
ख़ाब में उसको रात भर देखा

Wednesday, October 9, 2024

माँ

Behr (2122 1212 22)

ममता 
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पूछता था किसी से कल कोई 
क्या है आखिर ये मेहरबाँ होना 
दिल ने तस्वीर ये तसव्वुर की
माँ के पल्लू का आसमाँ होना 

पूजा 
===
गर इबादत का है तरीक़ा के
रूह को खुद है राब्ता होना 
क्यों है दरकार फिर इबादत में
बेग़रज़ कोई दरमियाँ होना

सच्चाई 
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बात झूठी तो अच्छी लगती है
तुम को मंज़ूर था गुमाँ होना
बात क्या मैंने एक सच कह दी
लाज़मी था तेरा जुदा होना

प्यार
===
प्यार की गुफ़्तगू में है मुमकिन 
चंद लफ़्ज़ों का पास ना होना 
उनसे मिलने के ऐन मौक़े पर 
खुद जुबां का ही बेज़ुबाँ होना 
 
सियासत 
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मुल्क बनते हैं जो बिगड़ने से 
उनका बेहतर है ख़ात्मा होना 
क्या ये सोचा भी है कभी तुमने 
कैसा लगता है बे मकाँ होना 

नसीहत 
=====
जाओ एक बार आइना देखो 
छोड़ दो खुद से बे इमां होना 
कैसे मंज़ूर है तुझे ऐसे 
दौड़ते खून का थमा होना 
 
ध्यान
====
एक ज़रिया है ध्यान का ये भी  
जिस्म से इस तरह जुदा होना 
डूबना है तुझे ख़यालों में 
जैसे शायर का गुमशुदा होना

Sunday, February 4, 2024

तिश्नगी

Bahr: 
  • 2122
  • 1212
  • 22

  • तेरी यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुनली सी हो गई मेरी 
    दिल ये डूबा है आसुओ में पर 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    तुम ही तुम सांस में समाये हो 
    फिर भी क्यों याद आ रही तेरी 
    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी

    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 
    अक्ल ये है के भूलना चाहे 
    दिल मगर है के कर रहा देरी 

    शेर दो चार इस तरह जोड़े 
    आँख माज़ी पे मैंने बस फेरी 
    शायरी है नहीं रग़ों में पर
    शायराना है ज़िन्दगी मेरी 






    ========================


    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी 
    दिल सराबों में आब ढूंढे है 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    ये अक्ल है के भूलना चाहे 
    दिल की धड़कन में हो रही देरी
    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 

    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी
    तुम ही तुम हो सांस में अब तो
    सांस लेकिन न आ रही मेरी 

    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी
    दिल सराबों में आब ढूंढे है
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 


    Monday, October 9, 2006

    दुश्मन से प्यार


    Bahr: 
  • 2122
  • 1212
  • 22

  • इश्क़ की हद को पार कर बैठा 
    दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा 
    उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार 
    आँख दो से मैं चार कर बैठा 

    दिल सम्भाला था एक अरसे से
    अब इसे तार तार कर बैठा
     
    ये जो होता खुमार उतर जाता 
    रिन्द सर पे सवार कर बैठा 

    बात जिसने थी रात काली की
    आज फिर दिन में याद कर बैठा
     
    क्या हुआ क्या पता क्या होता है
    धड़कनें बेशुमार कर बैठा

    इक सिफ़त हो तो मैं बताऊँ तुझे 
    उनकी आँखें मैं याद कर बैठा 

    बात ईमान की जो की उसने  
    मुझको वो बे इ मान कर बैठा 

    इश्क़ की हद को पार कर बैठा 
    दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा 


    ==================================


    Ishq ki hud ko paar kar baitha
    Pyar ke baad pyaar kar baitha
    Log aadil ki baat karte hain [aadil = judgement]
    Galatiyan baar baar kar baitha

    Unke aate hi sar-e-bazm-e-mazaar
    Aankh do se mai chaar kar baitha

    Dil sambhala tha ek arse se
    Ab isay taar taar kar baitha

    Aisi baatein jo rat jagaati mujhay
    Din dihaade mai yaad kar baitha

    Kya hua kya pata kya hota hai
    Dhadkanaen beshumaar kar baitha

    Ik sifat ho to mai bataaoon Vivek
    Unki aankhen mai yaad kar baitha

    Ishq ki hud ko paar kar baitha
    Pyar ke baad pyaar kar baitha

    ख़ामोशी

    ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...