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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Monday, June 17, 2024

मन कंगन

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

मन चाहत जो भी नाहि मिले 
मिल जाये कदर वा की ना करे 
अभिमानी प्रपंची हठ ये धरे 
और बाजे छन छन छन 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

जब ध्यान करे और ज्ञान धरे 
तब एक अग्र चित हाथ धरे 
मन बाहर से आघात करे 
और डोले यह आसन 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

यह चंचल और चपल मन है 
चिंतन इसको प्रति पल पल है 
आकाश में घिर घिर आये 
जैसे कारे बादल 

मतवारा मोरा मन 
चंचल जैसे कंगन
मतवारा मोरा मन 

Sunday, April 14, 2024

ज़िम्मेदार

मेरे जीवन के मौसम की तू बहार लगता है 
मैं नैया हूँ भँवर में तू मेरी पतवार लगता है 
किसी के मन में तो कोई उतर सकता नहीं लेकिन 
तेरे एहसास की सौगंध मुझे तू यार लगता है 

बुलाने की कभी तुझको ज़रुरत ही नहीं पड़ती 
मेरा बस सोचना तुझको मेरी पुकार लगता है 

मेरी चाहत मेरे सब शौक़ की बातें न मुझसे कर 
तुझे जो ना गवारा हो मुझे बेकार लगता है 

अलावा तेरे कोई भी न हमसे मिलता जुलता है 
तेरा होना मेरे संसार को संसार लगता है 

मेरी गलती पे मुझको टोकना तेरा मुनासिब है 
ख़फ़ा तुम मुझसे हो जाओ तो मन लाचार लगता है 

अगर जीवन में कोई भी मेरे कोई तमाशा हो 
मेरा ज़िम्मा तू रख लेगा तू ज़िम्मेदार लगता है 

Friday, April 5, 2024

बेचैन

तू कौन है 
तू कहाँ पे है

तू दिल में है
या जाँ 
में है
तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा 

बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
तुझे आशकी  
में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
तुझे खुशबुओं 
में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
तुझे होश 
में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा 

दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
आवाज़ 
में नहीं है नाखून मे नहीं है 
तू किताब 
में नहीं है मजमून में नहीं है 
तू जुनून 
में नहीं है तू सुकून में नहीं है

फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल

तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा


Thursday, April 4, 2024

याद आ गई

देखता था कल छत पे नज़ारा  

छोटे छोटे से बच्चों को निवाला

जब चिड़िया ने चोंच से खिलाया

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 


लेके आती थी तू आसमा से तारा 

आज पता चला जग देखा सारा  

आंसुओं का स्वाद होता है खारा  

माँ तेरी याद गई 


तेरी पोती भी है तुझसी ही प्यारी 

बात करती है वो मगर बहुत सारी 

एक दिन वो भी हो जाएगी नारी 

माँ तेरी याद गई 


पूजा करती तू लगाती थी रोली 

चाहे हो दिवाली या हो फिर होली 

मेरी भर दे फिर प्यार की झोली 

माँ तेरी याद गई 


तेरे हाथों से मैं कितना नहाया 

मैंने कितना है तुझको थकाया 

आज देख फिर मैं आंसू से नहाया  

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

Friday, February 23, 2024

वो भी है

ज़र्रा ज़र्रा बोलता है 
एक है तू दो भी है 
कश-म-कश कैसी है तेरी 
मैं अगर हूँ वो भी है 

वो न होता तो ख़ुदाया 
ख़ाब कैसे देखता 
ख़ाब ये तेरे नहीं हैं 
ख़ाब तेरे जो भी हैं 

तुझमें जो मय🍷 की तरह है 
मैं😠 भी तेरा है ख़ुदा 
मय🍷 में भी मैं😮 ही बसा है 
क्या पता तुझको भी है?

दिल दिया है जाँ भी दी है 
सांस दी है आस भी 
रह गया एहसास देना 
ये गिला उसको भी है 

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ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...