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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, July 8, 2009

Mai nahi biktaa(मैं नहीं बिकता)

तू बता कैसे मैं उस ख़त में ये तुझे लिखता
के चाह कर भी मैं बाज़ार में नहीं बिकता

मैं किस तरह किसी तनहा की अब तलाश करुँ
मुझको तन्हाई में तनहा कोई नहीं दीखता

तलाशता हूँ मुद्दतो से इस हथेली पे
तू लकीरों में अगर है तो क्यूँ नहीं दीखता

तू बेवफा भी अगर है तो कोई रंज नहीं
मैं ये समझूंगा तू मेरा कभी सनम इक था

मैं सोचता हूँ वास्ता अगर नहीं होता
तू मेरा नाम किताबों में तो नहीं लिखता

वो चाहते ही नहीं है तो छोड़ उनको विवेक
एक तरफा कोई रिश्ता कभी नहीं टिकता

तू बता कैसे मैं उस ख़त में ये तुझे लिखता
के चाह कर भी मैं बाज़ार में नहीं बिकता

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...