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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Monday, December 2, 2024

बस ख़्वाब है

बस ख़्वाब है बस ख़्वाब है 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 
सोए हुए हम तुम सभी 
झूठे सभी जज़्बात हैं 

इस नींद में थकना भी है 
रोना भी है हँसना भी है 
इस नींद में जगना भी है 
फिर नींद में सोना भी है 

ख़्वाबों के भी कुछ ख़्वाब हैं 
झूठे सभी जज़्बात हैं 
सोए हुए हम तुम सभी 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

ये ख़्वाब भी है कमाल का 
है मलाल खुद ही सवाल का 
है हयात का तेज़ाब का 
है नशा ये जैसे शराब का 

ख़्वाबों की ये इक किताब है 
झूठे सभी जज़्बात हैं 
सोए हुए हम तुम सभी 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

बस ख़्वाब है बस ख़्वाब है 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

Sunday, August 4, 2024

आते जाते

मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

हरदम ही गुनगुनाना हरदम ही मुसकुराना 
तुम कैसे ढूंढते हो हंसने का कोई बहाना 
अच्छा,
अब तो बताओ के तुम कैसे फ़रमाते
अगर मैं रूठ जाती मुझको कैसे मनाते 

कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 
मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2

पैग़ाम देखा तेरा तो फिर याद आ गया रे 
मैं कुछ,
भूल गया गलती से और पकड़ा गया रे 
फिर सोचा अब तो तुझको मनाना पड़ेगा 
और ये गीत बन गया देखो मनाते मनाते 

मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

Wednesday, July 17, 2024

बिजली

आज फिर बारिश हुई 
फिर भी हम रोए नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

करवटों से सिलवटें 
रात भर बढ़ती रही 
फैसलों के वास्ते 
हम कहीं खोए नहीं 

ये भी कैसी बात है जो 
लफ़्ज़ में ढलती नहीं 
अपने दामन मुह छुपाकर 
कबसे हम रोए नहीं 

ये भी सच है इस में तेरी 
और मेरी गलती नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

आज फिर बारिश हुई 
फिर भी हम रोए नहीं 
रात भर बिजली गिरी 
और हम सोए नहीं 

Saturday, June 22, 2024

गुलशन

भीनी सी सौंधी हवा है 
मन को जो महका रही है 
बोझिल सी साँसों को मेरी 
हौले से बहला रही है 

सूरज की किरणों को छूकर 
खिल जाए बाग़ों की कलियाँ 
जज़्बों को मेरे जगाकर 
महके इरादों की गलियाँ
दिलकश हवाएं भी इजहार से 
गुलशन को लहका रही हैं ||  भीनी सी सौंधी हवा है  

क़ुदरत बनाती है नमे 
पंछी उसे गुनगुनाते 
मदहोश करता है आलम 
धुन ये सुनाते सुनाते 
बादल की लड़ियाँ आकाश के
नज़ारों में इठला रही हैं

भीनी सी सौंधी हवा है 
मन को जो महका रही है 
बोझिल सी साँसों को मेरी 
हौले से बहला रही है 

-- partnered creation by दीपाली & विवेक पोहरे 

Tuesday, June 4, 2024

बस इक दफ़ा

बस इक दफ़ा तुझे मिलने की मोहलत ही चाहिए 
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

आँख भर देख के भर जाए दिल तो क्या ही बात हो 
तेरे होंटों के लरज़िशों सी बेबसी भी चाहिए 
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

फूल इठलाना सीख जाएँ तेरी चाल देख कर 
तेरे सबक़ के साथ इनको नसीहत भी चाहिए 
फिर इन्हें कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

बात तस्वीर से बन जाती तो इतना बुरा न था 
मेरी दुनिया को तेरे दिल की मुहब्बत भी चाहिए 
फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

Sunday, June 2, 2024

मन ख़ानाबदोश है

मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है 
मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन 

कहाँ से चला था कहाँ ये रुकेगा 
ये जीतेगा किससे कहाँ ये झुकेगा 
ये किसको है पता और किसे है खबर

मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन 

नज़र में है दुनिया नज़र में ज़माना 
जहाँ दिल न चाहे वहाँ फिर न जाना 
है मर्ज़ी का मालिक जवाँ सरफ़रोश है 

मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन 

न है इसको थकना न है इसको रुकना 
तमन्ना तो है इसकी जहाँ को है तकना 
क़िस्मत में है सफर और डगर पे नज़र 

मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है 
मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन

Friday, May 31, 2024

दिल चाहता है

आईने में चेहरा है 
चेहरे पे आँखें हैं 
आँखों ने देखा 
जिसे दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दिल में जो धड़कन है 
धड़कन में चाहत है 
चाहत वही है 
जिसे दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दुनिया डराती है 
धड़कन बताती है 
वो ही सही है 
जो भी दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

आँखों में नींदें हैं 
नींदों में सपने हैं 
सपनों में वो हैं 
जिसे दिल चाहता है  

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

दौलत लुभाती है 
शोहरत बुलाती है
रहना वहीं है 
जहाँ दिल चाहता है 

दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

Monday, May 27, 2024

कुछ बातें

कुछ बातें 
तो रह जाती हैं बातों में 
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में 

धुंधली सी
आँखों की बरसातों में 
कुछ बातें 
झूमती हैं हवाओं में 

रह जाती हैं कुछ बातें 
कह जाती हैं कुछ रातें 
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते 

दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें 

कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में 
मुझे पागल 
बना जाती जज़्बातों से

बड़ी उलझन 
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे 
 
हारना तो नहीं मुझे 
जीतना भी नहीं मुझे 
तो कैसे मैं कहूँ तुझे 

कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे 

तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें

Thursday, May 16, 2024

दुनिया

तेरे लफ़्ज़ों में मेरी बात छुपी रहती है 
मैं ही कहता हूँ समझ जब भी तू कुछ कहती है  
मैं कहाँ रहता हूँ मुझको तो कुछ खबर ही नहीं 
तू सदा से ही मगर मेरे दिल मे रहती है 

तुझे जाना है तो जा किसने तुझको रोका है 
तेरा जाना मेरी आँखों के लिए धोखा है 
मैं हूँ सागर तेरा उलफ़त मे इंतज़ार करूं 
तू किसी दरिया सी बस मेरे तरफ बहती है

तू सदा से ही मगर

मुड़ के ना देख देख मुड़ के जिसने देखा है 
वो कभी बढ़ ना सके किसने उनको देखा है 
हर घड़ी कोसने की आदतें हैं दुनिया की 
छोड़ दुनिया की बात दुनिया कुछ भी कहती है 

तू सदा से ही मगर

Tuesday, May 14, 2024

आदतें

आदतें 
नहीं बदलती कभी 
लोग ढल जाते हैं 
पर बदलना गवारा नहीं 

आदतें 
ज़रा सा रुक जाती हैं 
फिर पकड़ ही लेती हैं 
छोड़ कर कभी जाती नहीं 

आदतें 
नई ये होती नहीं 
दिल मे कसक की तरह 
ये नजर कभी आती नहीं 

आदतें 
छूटेगी कैसे भला 
पूछता हूँ मैं इसे 
कुछ भी बतलाती नहीं 

Friday, April 26, 2024

ज़माने

ऐसा क्या देखा मेरी आँखों में 
के बस ही गए हो निगाहों में 
भला किसने तुमको बताया है  
के चाँद तारे हैं मेरी आँखों में 

बन के दरिया मैं जिसमें मिल जाऊँ 
वो समंदर है तेरी आँखों में 
माना घाटे का मेरा सौदा है 
पर मुनाफ़ा है तेरी आँखों में 

देखते हो जो एक टक तो बता 
ख्वाब कितने हैं मेरी आँखों में 
डर मुझे है के आँख सच ना कहे 
राज़ रहते हैं मेरी आँखों में 

ये जहां देख लिया देख लिया 
कोई जचता नहीं है आँखों में 
हर एक पल नया ज़माना है 
तुम ज़माने हो मेरी आँखों में 

||||| FEMALE
||||| MALE

Friday, April 19, 2024

प्यास आँखों की

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

सब्र कर लेंगे क़यामत का और क़िस्मत का 
तुझको ऍ दोस्त हम दोस्ती सिखा देंगे 

राह में तेरी हम ऐसे मुंतज़िर होंगे 
दिल को धड़कते ही रहने की हम सज़ा देंगे 

आईना उम्र की दहलीज़ें जब दिखाएगा 
घर से अपने हम हर आईना हटा देंगे 

इस दफ़ा ना सही लेकिन ये तो होगा इक दिन 
तुझको हर हाल मे हम बस अपना बना लेंगे 

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

Sunday, April 14, 2024

तुम क्या कर रही हो अभी

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

क्या तूने मुझको याद किया 
या फिर तू मुझको भूल गया 
क्यूँ लगता है मन को ये पिया  
तू खुद पूछेगा नहीं ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

सारा दिन कैसे निकलेगा 
दिल ख़ाब ये तेरे देखेगा 
तेरा पैग़ाम ये आएगा 
पूछेगा फिर तू यही ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 

अच्छा लगता है पूछते हो 
मुझको यूँ समझते बूझते हो 
दिल की बातें तुम जानते हो 
मेरे हमदम हो तभी 

बस यूँही बात कर लो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो ना फिर से अभी
तुम क्या कर रही हो अभी 

Wednesday, April 10, 2024

बिसरी सी महक

धूप आती है तो बारिश भी साथ लाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
बाद बारिश के यहाँ बाढ़ सी आ जाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं हैं तेरे अब इस घर में  
वो जगहा खाली तेरे गीत गुनगुनाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

नींद आती है बोहोत 
नींद आती है बोहोत 
थकन से सारे दिन के नींद तो आती है बोहोत 
कोई घुँघरू की छनक रात भर जगाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे ये कह के भूल जाता हूँ  
तेरी यादें क्या मेरी उम्र भर का साथी है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ कुछ भी ना माँगूँ रब से 
कोई बिसरी सी महक याद कुछ दिलाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

Friday, April 5, 2024

प्यार नज़र आता है

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धड़क जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरे बिन ना रह पाना, तू नहीं तो घबराना 
ख्वाबों में तुझे पाकर नींदों का उड़ जाना 
तेरा एहसास मेरी आस को बढ़ाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरी सूरत तेरी खुशबू ये हवा में तेरा जादू 
तेरा चलना तेरा रुकना करता है बेकाबू 
ये तेरा मजनू तेरे गीत गुनगुनाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धडक जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

Tuesday, March 12, 2024

रुहदारी

तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

कितना भी समझाओ इसको मक्कारी करता है 
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

हफ़्तों से मिलने की देखो तैयारी करता है 
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

कभी दिन में हो कभी रात हो 
बेवक़्त ही कोई बात हो 
दिल धक् धक् कर के कितनी होशियारी करता है 
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

तुम आओगे छा जाओगे 
या ऐसे ही चले जाओगे 
तेरे इरादों से मुझको जुआरी करता है 
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

अजी आओ तो फ़रमाओ तो 
हमसे बातें बतलाओ तो 
तेरा ये मजनू बातें बड़ी प्यारी करता है 
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है
तेरे इश्क़ में दिल रुहदारी रुहदारी करता है

Wednesday, January 31, 2024

खेल

ये खेल है सितारों का कहानी का किताबों का सवालों का जवाबों का पेचीदा पड़े हिसाबों का

ये खेल है रुबाबों का शख़्सीयति हिजाबों का अमीरों का नवाबों का ग़रीबों का गुनाहों का

ये खेल है सराबों का

सन्नाटों का आवाज़ों का शराबों का हयातों का रूहों का ख़राबों का

ये खेल है ख़यालों का कहानी के किरदारों का तन्हाई की शामों का जानों का जहानों का

ये खेल है तलाशों का अपनों का ख़ुदाओं का ग़ुज़ारिश का नियाज़ों का हैरत का हैरानों का

ये खेल है आकाशों का रस्तों का मीनारों का कांटों का गुलाबों का मैं का मैखानों का

ये खेल है ज़दाओं का हुस्नों का अदाओं का पर्दों का हयाओं का आग़ाज़-ओ-अंजामों का

ये खेल है हवाओं का सांसों का दुआओं का बिखरे पड़े तमाशों का ख़ामोशी-अल्फ़ाज़ों का

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...