About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Monday, December 2, 2024
बस ख़्वाब है
Sunday, August 4, 2024
आते जाते
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते
Wednesday, July 17, 2024
बिजली
Saturday, June 22, 2024
गुलशन
Tuesday, June 4, 2024
बस इक दफ़ा
Sunday, June 2, 2024
मन ख़ानाबदोश है
Friday, May 31, 2024
दिल चाहता है
Monday, May 27, 2024
कुछ बातें
कुछ बातें
तो रह जाती हैं बातों में
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में
धुंधली सी
आँखों की बरसातों में
कुछ बातें
झूमती हैं हवाओं में
रह जाती हैं कुछ बातें
कह जाती हैं कुछ रातें
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते
दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें
कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में
मुझे पागल
बना जाती जज़्बातों से
बड़ी उलझन
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे
हारना तो नहीं मुझे
जीतना भी नहीं मुझे
तो कैसे मैं कहूँ तुझे
कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे
तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें
Thursday, May 16, 2024
दुनिया
Tuesday, May 14, 2024
आदतें
Friday, April 26, 2024
ज़माने
Friday, April 19, 2024
प्यास आँखों की
Sunday, April 14, 2024
तुम क्या कर रही हो अभी
Wednesday, April 10, 2024
बिसरी सी महक
Friday, April 5, 2024
प्यार नज़र आता है
Tuesday, March 12, 2024
रुहदारी
Wednesday, January 31, 2024
खेल
ये खेल है सितारों का कहानी का किताबों का सवालों का जवाबों का पेचीदा पड़े हिसाबों का
ये खेल है रुबाबों का शख़्सीयति हिजाबों का अमीरों का नवाबों का ग़रीबों का गुनाहों का
ये खेल है सराबों का
सन्नाटों का आवाज़ों का शराबों का हयातों का रूहों का ख़राबों का
ये खेल है ख़यालों का कहानी के किरदारों का तन्हाई की शामों का जानों का जहानों का
ये खेल है तलाशों का अपनों का ख़ुदाओं का ग़ुज़ारिश का नियाज़ों का हैरत का हैरानों का
ये खेल है आकाशों का रस्तों का मीनारों का कांटों का गुलाबों का मैं का मैखानों का
ये खेल है ज़दाओं का हुस्नों का अदाओं का पर्दों का हयाओं का आग़ाज़-ओ-अंजामों का
ये खेल है हवाओं का सांसों का दुआओं का बिखरे पड़े तमाशों का ख़ामोशी-अल्फ़ाज़ों का
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...