About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Tuesday, April 30, 2024
वेहम
फ़रेब
ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा
जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा
कहाँ ये लौट कर मिला
जो एक बार दे दिया
बरस गया फ़लक से जो
ना फिर फ़लक पे आएगा
ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा
ये जंग दिल दिमाग की
ये जंग आब आग की
बुझा बुझा रहेगा तू
जो जंग हार जाएगा
जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा
ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा
Friday, April 26, 2024
ज़माने
रूठना तेरा
Thursday, April 25, 2024
गँवार
Wednesday, April 24, 2024
जो तू है वो मैं भी हूँ
Monday, April 22, 2024
साक़ी
Friday, April 19, 2024
प्यास आँखों की
Thursday, April 18, 2024
आवाज़
Monday, April 15, 2024
क्या ख़बर है तेरी
Sunday, April 14, 2024
तुम क्या कर रही हो अभी
ज़िम्मेदार
Saturday, April 13, 2024
मज़ा
Friday, April 12, 2024
किताबी फूल
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो
लिखता है कहानी तो लिख कर तू भूल जा
खुद को ही कहानी का किरदार मत करो
थोड़ा तो आज़मा लो कहते हैं तजरुबे
एक तरफ़ा कभी प्यार बे शुमार मत करो
खायेगा फिर से धोखा अगर प्यार करेगा
खुद से ही अब खुद को गद्दार मत करो
कमज़ोर सा ये दिल है, है ये मोम से बना
अंगार से जला के तार तार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
Thursday, April 11, 2024
फ़रिश्ता
Wednesday, April 10, 2024
बिसरी सी महक
Tuesday, April 9, 2024
सदा
Sunday, April 7, 2024
नमी
[चश्मे सराब = like mirage], [ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]
[शबाब = youth]
[हबाब = bubble]
[जुस्तजू = desire]
Saturday, April 6, 2024
मार डाला
Friday, April 5, 2024
बेचैन
तू कौन है
तू कहाँ पे है
तू दिल में है
या जाँ में है
तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
तुझे आशकी में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
तुझे खुशबुओं में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
तुझे होश में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा
दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
आवाज़ में नहीं है नाखून मे नहीं है
तू किताब में नहीं है मजमून में नहीं है
तू जुनून में नहीं है तू सुकून में नहीं है
फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल
तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
प्यार नज़र आता है
Thursday, April 4, 2024
याद आ गई
देखता था कल छत पे नज़ारा
छोटे छोटे से बच्चों को निवाला
जब चिड़िया ने चोंच से खिलाया
ओ माँ तेरी याद आ गई
माँ तेरी याद आ गई
ओ माँ तेरी याद आ गई
लेके आती थी तू आसमा से तारा
आज पता चला जग देखा सारा
आंसुओं का स्वाद होता है खारा
ओ माँ तेरी याद आ गई
तेरी पोती भी है तुझसी ही प्यारी
बात करती है वो मगर बहुत सारी
एक दिन वो भी हो जाएगी नारी
ओ माँ तेरी याद आ गई
पूजा करती तू लगाती थी रोली
चाहे हो दिवाली या हो फिर होली
मेरी भर दे फिर प्यार की झोली
ओ माँ तेरी याद आ गई
तेरे हाथों से मैं कितना नहाया
मैंने कितना है तुझको थकाया
आज देख फिर मैं आंसू से नहाया
ओ माँ तेरी याद आ गई
माँ तेरी याद आ गई
ओ माँ तेरी याद आ गई
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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सब है पराया रख ना क्या है ग़म हैं किसी के अ पना क्या है उम्र गुज़ारी खुल गई आँखें उम्र गुज़ारी अब जागा हूँ उम्र गुज़ारी त...
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तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं न कैद ही किया मुझको न ही रियाह ...
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जब कभी तेरा ख़याल आता है जाने क्या दिल को हुआ जाता है वक़्त ठहरा हुआ सा लगता है तू मेरे दिल में समा जाता है ग़ैर लगती है ये दुनिया मुझ को तू सग...