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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, April 30, 2024

वेहम

जो हकीक़त है वो ख़ाबों के लिए खोते हैं 
ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 
असल में खाब का अंजाम ऐसा होता है 
दौड़ते भागते हम जागते न सोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

किसी के हैं बोहोत किसी के ख़ाब थोड़े हैं 
कौन बिखरे हुए ख़ाबों को फिर से जोड़े है 
हर कोई देखता ज़रूर है मगर फिर भी 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

ख़ाब इक प्यास है हकीक़त से नहीं मिटती 
वो कहानी है जो किसी से भी नहीं मिलती 
ये वेहम उम्र भर हम शाम-ओ सहर बोते हैं 

ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

फ़रेब

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा
जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा

कहाँ ये लौट कर मिला
जो एक बार दे दिया
बरस गया फ़लक से जो
ना फिर फ़लक पे आएगा

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा

ये जंग दिल दिमाग की
ये जंग आब आग की
बुझा बुझा रहेगा तू
जो जंग हार जाएगा

जो दिल किसी को दे दिया
तो फिर ना हाथ आएगा

ज़रा संभल के चल यहां
फ़रेब आज़माएगा

Friday, April 26, 2024

ज़माने

ऐसा क्या देखा मेरी आँखों में 
के बस ही गए हो निगाहों में 
भला किसने तुमको बताया है  
के चाँद तारे हैं मेरी आँखों में 

बन के दरिया मैं जिसमें मिल जाऊँ 
वो समंदर है तेरी आँखों में 
माना घाटे का मेरा सौदा है 
पर मुनाफ़ा है तेरी आँखों में 

देखते हो जो एक टक तो बता 
ख्वाब कितने हैं मेरी आँखों में 
डर मुझे है के आँख सच ना कहे 
राज़ रहते हैं मेरी आँखों में 

ये जहां देख लिया देख लिया 
कोई जचता नहीं है आँखों में 
हर एक पल नया ज़माना है 
तुम ज़माने हो मेरी आँखों में 

||||| FEMALE
||||| MALE

रूठना तेरा

इस तरह से लूटना तेरा 
दिल को छू जाए रूठना तेरा 
याद रह जाए यूँ मनाने पर
प्यार करने पे टूटना तेरा 

जो सज़ा चाहो वो सज़ा दे दो 
मुझको मंजूर कूटना तेरा 
बेरुखी मुझको करती है मायूस 
अब जरूरी है फूटना तेरा 

दूर जाने की सोचना भी नहीं 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 
सह न पाऊँगा छूटना तेरा 

Thursday, April 25, 2024

गँवार

आजकल ख़ुद से ही फ़रार हैं हम 
कहीं मसरूफ़ लगातार हैं हम 
लाख कह लो के तुम नहीं मेरे 
फिर भी तेरे ही बार बार हैं हम 

रूठ कर रुख भी ऐसे मोड़ लिया 
और कहते हो ऐतबार हैं हम 

तुम कहो ना कहो पता है हमें 
तेरे ही दिल में गिरफ़्तार हैं हम 

तेरी नज़रों की खोज लाज़िम है 
इत्तेफ़ाक़न बड़े मक्कार हैं हम 

इस क़दर तेरी बेक़रारी देख 
लोग समझेंगे इंतज़ार हैं हम 

दिल ये दुखता है इस हक़ीक़त से 
तेरी नज़रों में गुनाहगार हैं हम 

देख तफ़्सील से सुकूं से ज़रा 
आईने में तेरा सिंगार हैं हम 

शहर के तौर यहाँ बे ढब हैं 
इन रिवाज़ों में तो गँवार हैं हम 

Wednesday, April 24, 2024

जो तू है वो मैं भी हूँ

जो ऊपर आसमाँ देखूं तो लगता है के पागल हूँ 
जो नीचे फर्श पे देखूं तो लगता है के घायल हूँ 
जो आँखें बंद कर बैठूं तो लगता है के कायर हूँ 
जो ख़ुद में झांकता हूँ तो 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 

मैं पागल हूँ मैं घायल हूँ 
मैं कायर हूँ समझता हूँ 
मगर खुद को ये कहकर मैं 
तुझे बदनाम कैसे करूँ  
तुझे बदनाम कैसे करूँ 
तुझे बदनाम कैसे करूँ 

मैं अब से सोचता हूँ खुद से मिन्नत खुद ही करता हूँ 
मुझे जो चाहिए खुद मैं ही खुद से मांग सकता हूँ 
ये मुश्किल है के आसान है 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ  

Monday, April 22, 2024

साक़ी

रिश्ते तमाम हैं पर मिलता कोई नहीं 
ग़लती से मिल भी जाए तो जुड़ता कोई नहीं 
दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
[साक़ी = one who serves drinks / शराब पेश करने वाले]

रिश्तों की आस खून के क़तरों से कहाँ है 
दुनिया में वो भी ख़ुश हैं जिनका कोई नहीं 

कैसी ये चोट दी है क्या दिल का हाल है 
के ज़ख्म तो गहरा है निशाँ कोई नहीं 

कैसा ये शहर तेरा रहते कहाँ हैं लोग 
रस्ते तमाम हैं यहाँ मकां कोई नहीं 

दिल डूबता है लेकिन देखो ये बेबसी 
नज़दीक यहाँ मेरे तिनका कोई नहीं

इस शोर शराबे में किससे कहे कोई 
सब बोलते हैं अपनी सुनता कोई नहीं

दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं

Friday, April 19, 2024

प्यास आँखों की

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

सब्र कर लेंगे क़यामत का और क़िस्मत का 
तुझको ऍ दोस्त हम दोस्ती सिखा देंगे 

राह में तेरी हम ऐसे मुंतज़िर होंगे 
दिल को धड़कते ही रहने की हम सज़ा देंगे 

आईना उम्र की दहलीज़ें जब दिखाएगा 
घर से अपने हम हर आईना हटा देंगे 

इस दफ़ा ना सही लेकिन ये तो होगा इक दिन 
तुझको हर हाल मे हम बस अपना बना लेंगे 

तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

Thursday, April 18, 2024

आवाज़

आदत की बात है ये इन्सां की चाहतों में 
ये दिन के बाद अक्सर ही शाम चाहता है 
हर इक को ज़िन्दगी में एक नाम तो मिला है 
फिर भी वो ज़िन्दगी में एक नाम चाहता है 

जम्हूरियत का होना बस नाम के लिए है 
होता कहाँ है जो कुछ अवाम चाहता है 

जो ज़िन्दगी में अपनी ख़ुद सर नहीं हुआ है 
वो ज़िन्दगी भी अपनी आज़ाद चाहता है 

ना सोचने की कोशिश दमाग़ कर रहा है 
जैसे थका मुसाफ़िर आराम चाहता है 

दर पे खड़ा हूँ तेरे इस तरह जैसे कोई 
बेरोज़गार इन्सां कुछ काम चाहता है 

ऊपर वो आसमा में बादल खड़ा है जैसे 
लम्बी सज़ा का मुजरिम अंजाम चाहता है 

फूलों की ख्वाहिशों में काँटा ही बन चुका है 
वालिद की फ़िक्र बेग़म औलाद चाहता है 

शायर के फ़लसफ़े में मेहनत लगी बड़ी है 
पढता तो शेर है बस इक दाद चाहता है 

बेताब सा सितारा तन्हाइयों का मारा 
कहना है कुछ उसे वो आवाज़ चाहता है 

Monday, April 15, 2024

क्या ख़बर है तेरी

और बता क्या ख़बर है तेरी 
आज कैसे याद आ गई मेरी 
तुम तो मसरूफ़ थे अपनी राहों पे 
आज क्यूँ राह मुड़ गई तेरी 

जबसे मंज़िलें तेरे ख्वाबों में हैं 
और बुलंदी तेरे इरादों में हैं 
नज़र तूने इधर नहीं फेरी 
तो आज कैसे याद आ गई मेरी 

कोई काम निकल आया होगा तेरा 
वरना वक़्त तो काफी ज़ाया होगा तेरा 
कहीं तुझे हो तो नहीं रही देरी 
वैसे कैसे याद आ गई मेरी 

अब आये हो तो ज़रा सुकून कर लो 
ताज़ी सी कुछ साँसें ही भर लो 
सफ़र में बोहोत काम आएँगी तेरी 
और बता क्या ख़बर है तेरी 

Sunday, April 14, 2024

तुम क्या कर रही हो अभी

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

क्या तूने मुझको याद किया 
या फिर तू मुझको भूल गया 
क्यूँ लगता है मन को ये पिया  
तू खुद पूछेगा नहीं ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

सारा दिन कैसे निकलेगा 
दिल ख़ाब ये तेरे देखेगा 
तेरा पैग़ाम ये आएगा 
पूछेगा फिर तू यही ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 

अच्छा लगता है पूछते हो 
मुझको यूँ समझते बूझते हो 
दिल की बातें तुम जानते हो 
मेरे हमदम हो तभी 

बस यूँही बात कर लो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो ना फिर से अभी
तुम क्या कर रही हो अभी 

ज़िम्मेदार

मेरे जीवन के मौसम की तू बहार लगता है 
मैं नैया हूँ भँवर में तू मेरी पतवार लगता है 
किसी के मन में तो कोई उतर सकता नहीं लेकिन 
तेरे एहसास की सौगंध मुझे तू यार लगता है 

बुलाने की कभी तुझको ज़रुरत ही नहीं पड़ती 
मेरा बस सोचना तुझको मेरी पुकार लगता है 

मेरी चाहत मेरे सब शौक़ की बातें न मुझसे कर 
तुझे जो ना गवारा हो मुझे बेकार लगता है 

अलावा तेरे कोई भी न हमसे मिलता जुलता है 
तेरा होना मेरे संसार को संसार लगता है 

मेरी गलती पे मुझको टोकना तेरा मुनासिब है 
ख़फ़ा तुम मुझसे हो जाओ तो मन लाचार लगता है 

अगर जीवन में कोई भी मेरे कोई तमाशा हो 
मेरा ज़िम्मा तू रख लेगा तू ज़िम्मेदार लगता है 

Saturday, April 13, 2024

मज़ा

मुझे आज इतना मज़ा आ रहा है 
जो कुछ चाहिए सब मिले जा रहा है 

पहाड़ों से देखो ये क्या दिख रहा है 
खिलौना वहाँ से कहाँ जा रहा है 
मैं बादल पे बैठूँ या मुट्ठी से पकड़ूँ 
मेरे मुँह से देखो धुंआं आ रहा है 

मैं झूलों पे बैठूं उड़ूँ फिर गगन में 
झुलाओ मुझे क्या मज़ा आ रहा है 
न जाने वो क्या है मेरी छत से देखो 
वो पंछी के जैसा उड़े जा रहा है 

चलाएंगे काग़ज़ की कश्ती बना कर 
वो बादल का टुकड़ा इधर आ रहा है 
चलो भीगते हैं सभी बारिशों में 
अरे मोर देखो यही गा रहा है 

मुझे आज इतना मज़ा आ रहा है 
जो कुछ चाहिए सब मिले जा रहा है 

Friday, April 12, 2024

किताबी फूल

करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 

लिखता है कहानी तो लिख कर तू भूल जा 
खुद को ही कहानी का किरदार मत करो 

थोड़ा तो आज़मा लो कहते हैं तजरुबे  
एक तरफ़ा कभी प्यार बे शुमार मत करो 

खायेगा फिर से धोखा अगर प्यार करेगा 
खुद से ही अब खुद को गद्दार मत करो 

कमज़ोर सा ये दिल है, है ये मोम से बना 
अंगार से जला के तार तार मत करो 

इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता 
ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो

Thursday, April 11, 2024

फ़रिश्ता

कभी कभी बग़ैर बात के मचलता है 
बोहोत मुश्किलों से दिल मेरा संभालता है 
बस इक दवा है मेरे पास ताज़गी के लिए 
ख़याल लिख के कलामों से दिल बहलता है 

उम्मीद रखना है फ़ुज़ूल ये हक़ीक़त है 
कहाँ किसी के लिए कोई भी बदलता है 
कभी तो घूँट भर का खून पी के देख ज़रा 
के कोई कैसे ज़ख्म अपने ही निगलता है 

यूँ गोल गोल सी बातों से मुझे ख़ुश न करो 
वो और होंगे जिन्हें सच में झूठ चलता है 
जला के रौशनी करोगे? मैं चराग़ नहीं 
मगर छुए जो मुझे अपने हाथ मलता है 

ये वक़्त झूठ है झूठी ये सब कहानी है 
ये चाँद झूठ मूठ डूबता निकलता है 
वो आसमाँ में सितारों का टूटना देखे 
एक बच्चा ख़ुशी से नाचता उछलता है 

ये जिस्म गर्म है अभी, अभी तो बात करो 
अभी तो मेरा हौसला भी उसे खलता है 
अभी न आएगा कोई भी ये पता है मुझे 
अभी तो मौत का फ़रिश्ता मुझसे डरता है 

Wednesday, April 10, 2024

बिसरी सी महक

धूप आती है तो बारिश भी साथ लाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
बाद बारिश के यहाँ बाढ़ सी आ जाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं 
निशाँ कुछ भी तो नहीं हैं तेरे अब इस घर में  
वो जगहा खाली तेरे गीत गुनगुनाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

नींद आती है बोहोत 
नींद आती है बोहोत 
थकन से सारे दिन के नींद तो आती है बोहोत 
कोई घुँघरू की छनक रात भर जगाती है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे 
भूलना है तुझे ये कह के भूल जाता हूँ  
तेरी यादें क्या मेरी उम्र भर का साथी है 
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ 
मुट्ठियाँ बंद करूँ कुछ भी ना माँगूँ रब से 
कोई बिसरी सी महक याद कुछ दिलाती है  
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

Tuesday, April 9, 2024

सदा

देखा जो उन्हें बाग़ में महसूस ये हुआ 
रंगीन था ये बाग़ महकता कभी न था 
सूरत तो उनकी दूर तक मशहूर थी मगर 
चेहरे से पहले हुस्न टपकता कभी न था 
[बाग़ = garden], [हुस्न = beauty]

नज़रों से देखते तो थे, इस बार बात की 
आँखों में पहले आब चमकता कभी न था 
पहले तमीज़ तीर की होती थी कुछ अलग 
करता था दिल पे चोट, गुज़रता कभी न था 
[आब = water]

दिल होश में रहता था शराबों के शहर में 
कितने भी जाम हों ये बहकता कभी न था 
दिल की रग़ों में जोश था लेकिन ये इस क़दर 
पैग़ाम देखने को तड़पता कभी न था 
[जाम = peg], [रग = veins], [पैग़ाम = messege]

देखी है क़ायनात में क़यामत से ज़ीनातें 
दो पल भी देखने को ठहरता कभी न था 
उनकी सदा सुनी है जबसे दिल को यूँ लगा 
दिल काम तो करता था धड़कता कभी न था 
[क़ायनात = universe], [क़यामत = doom day]

Sunday, April 7, 2024

नमी

मेरे चेहरे से न तू पढ़ मुझे 
मेरा चेहरा जिल्द-ए-किताब है 
मेरी ज़िन्दगी के सफ़े पलट 
फिर पूछ जो भी सवाल हैं 
[जिल्द-ए-किताब = book cover], [सफ़े = pages]

न करो ये दिखने की कोशिशें 
यहाँ दिखना चश्मे सराब है 
तेरी रौशनी को ख़बर नहीं 
यहाँ ज़ुल्मतों के हिजाब हैं 
[चश्मे सराब = like mirage], [
ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]

मेरे ज़ख्म का ना हिसाब ले 
मेरे ज़ख्म तो बे-हिसाब हैं 
तू कहे तो और सवाँर लूँ 
मेरे ज़ख्म मेरा शबाब है
[
शबाब = youth]

कोई कह रहा था के ज़िन्दगी 
एक ला जवाब सा ख़्वाब है 
इस ख्वाब में सच कुछ नहीं 
और जिस्म सारे हबाब हैं
[
हबाब = bubble]

क्या कहूं मैं कैसे कहूं उसे 
मुझे दिखता कैसा ये ख़्वाब है 
कहीं नम सी आँख में खून है 
कहीं जुस्तजू में शराब है
[
जुस्तजू = desire]

Saturday, April 6, 2024

मार डाला

जिन्हें चाहतें थी तेरी चाहतों की 
तेरी हसरतों ने उन्हें मार डाला 
तेरी ज़ुल्फ़ की उलझनों से जो निकले
निगाहों ने तेरी उन्हें मार डाल 

तेरी खुशबू जैसा महकता है संदल 
तेरे तन बदन का सुखन है निराला 
जिन्हें तेरी आँखों ने देखा नहीं था 
अदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला 

तेरे सुर्ख होंठों पे लफ्जों के झरने 
नहीं जिसने देखे अकल पे है ताला 
तेरे मयकदे तक न जो आ सके हों  
सदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला  

Friday, April 5, 2024

बेचैन

तू कौन है 
तू कहाँ पे है

तू दिल में है
या जाँ 
में है
तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा 

बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
तुझे आशकी  
में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
तुझे खुशबुओं 
में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
तुझे होश 
में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा 

दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
आवाज़ 
में नहीं है नाखून मे नहीं है 
तू किताब 
में नहीं है मजमून में नहीं है 
तू जुनून 
में नहीं है तू सुकून में नहीं है

फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल

तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा


प्यार नज़र आता है

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धड़क जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरे बिन ना रह पाना, तू नहीं तो घबराना 
ख्वाबों में तुझे पाकर नींदों का उड़ जाना 
तेरा एहसास मेरी आस को बढ़ाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तेरी सूरत तेरी खुशबू ये हवा में तेरा जादू 
तेरा चलना तेरा रुकना करता है बेकाबू 
ये तेरा मजनू तेरे गीत गुनगुनाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

तू कहे या ना कहे मुझको समझ जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 
मेरा ये दिल क्यूँ तुझे देख धडक जाता है 
तेरी आँखों में मुझे प्यार नज़र आता है 

Thursday, April 4, 2024

याद आ गई

देखता था कल छत पे नज़ारा  

छोटे छोटे से बच्चों को निवाला

जब चिड़िया ने चोंच से खिलाया

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 


लेके आती थी तू आसमा से तारा 

आज पता चला जग देखा सारा  

आंसुओं का स्वाद होता है खारा  

माँ तेरी याद गई 


तेरी पोती भी है तुझसी ही प्यारी 

बात करती है वो मगर बहुत सारी 

एक दिन वो भी हो जाएगी नारी 

माँ तेरी याद गई 


पूजा करती तू लगाती थी रोली 

चाहे हो दिवाली या हो फिर होली 

मेरी भर दे फिर प्यार की झोली 

माँ तेरी याद गई 


तेरे हाथों से मैं कितना नहाया 

मैंने कितना है तुझको थकाया 

आज देख फिर मैं आंसू से नहाया  

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

माँ तेरी याद गई 

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...