About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Saturday, November 30, 2024
बात इतनी सी है
Thursday, September 12, 2024
राग़िब
Monday, August 26, 2024
बाज़ आएंगे नहीं
Wednesday, July 17, 2024
मारा
किसी को प्यास ने मारा
कोई हसरत में जलता था
किसी को यास ने मारा
किसी को यार ने मारा
किसी को खास ने मारा
उसे तो इल्म भी ना था
जिसे एख़्लास ने मारा
किसी एहसास ने मारा
दिल-ए-उदास ने मारा
कभी दिलबर के बातों की
सर-ए-मिठास ने मारा
कभी तो वस्ल ने मारा
कभी फ़िराक़ ने मारा
कभी परवाने को उसके
दिल ए बकवास ने मारा
किसी को काश ने मारा
किसी को ताश ने मारा
जिसे सांसों की आदत थी
उसी को सांस ने मारा
Friday, June 21, 2024
आब
आसमानों से आता है हर हुनर का ये बानी है (बनाने वाला - architect)
ये सच्ची बात है देखो हर किसी ने ये मानी है
ये अपनी चाल से काटे ज़माने भर की उलझन को
ज़ेहन में याद रख जाए बड़ा ये दास्तानी है
किसी पैग़ाम से मिल कर ये हमदम की निशानी है
इसे जो पढ़ सके कोई तो फिर ये रा'ए ज़ानी है (टिप्पणी - commentary )
कोई भी छोड़ ना पाया अभी तक इस अकेले को
बहुत नायाब है देखो बड़ा ये पास्तानी है (प्राचीन - antique)
जहां पर ये नहीं होता वहां आनी ना जानी है
जहां भी ये बिखर जाए वहां बस शादमानी है (खुशी - joy)
ये हरदम राज करता है महफ़िलों की ये रानी है
बिना इसके बड़ी सूखी बदगुमा मेज़बानी है
इसे दे दो ज़रा इज़्ज़त कोई इसका ना सानी है
ज़िन्दगी जब से चलती है बात इतनी पुरानी है
ये पानी है ये पानी है बड़ा ही खान दानी है
बुढ़ापे में दवा सा है जवानों की जवानी है
हयात-ए-आब पानी है ज़हर की राख पानी है
ज़िंदगी के लिए पानी मौत के बाद पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
दिखावा
Wednesday, June 5, 2024
बदल जाएंगे
Tuesday, May 14, 2024
जाएज़ा
Monday, April 15, 2024
क्या ख़बर है तेरी
Tuesday, April 2, 2024
जवाँ
Wednesday, March 20, 2024
शोर
Wednesday, March 6, 2024
आवारगी
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...