About Me

My photo
I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Showing posts with label free. Show all posts
Showing posts with label free. Show all posts

Saturday, November 30, 2024

बात इतनी सी है

बात कहने न सुनने समझने की है 
बात ये बात में न उलझने की है 
बात की बात के तेरी धड़कन को मैं 
सुन सकूं मेरी धड़कन को तू सुन सके 
बात इतनी सी है 

क्या मुनासिब है क्या है रवायत यहाँ 
पीढ़ी दर पीढ़ियों तक जो कहता रहा 
पर मुनासिब था तब जो ये किसको पता था 
मुनासिब रहेगा हमेशा यहाँ 
बात इतनी सी है 

है मेरी नाक तुझसी मेरी आँख तुझसी 
मेरे हाथ तुझसे मेरी भूख तुझसी 
धरम और मज़हब ने कब तुझसे मुझको 
अलग था बताया ज़रा ये बता 
बात इतनी सी है 

चाँद सूरज सितारे या फिर आसमां 
ज़िन्दगी सबको देते हैं इक सी यहाँ  
कुइ पंछी कभी भी किसी और पंछी 
को कहता नहीं मैं यहाँ तू वहाँ 
बात इतनी सी है 

जीभ पे ज़ायक़ा तो सभी का है इक सा 
नमक कोई मीठा तो कहता नहीं 
ये दिल चाहे कितनी करे ऐहतरामी 
मगर बे लिहाज़ी भी सेहता नहीं 
बात इतनी सी है 

तू सच है तो सच ये भी है के कोई 
झूठ की डोर को है संभाले हुए 
अगर झूठ ही न हुआ करता तो क्या तू 
दीखता कभी दिल जलाते हुए 
बात इतनी सी है 

बात कहने न सुनने समझने की है 
बात ये बात में न उलझने की है 
बात की बात के तेरी धड़कन को मैं 
सुन सकूं मेरी धड़कन को तू सुन सके 
बात इतनी सी है 

Thursday, September 12, 2024

राग़िब

राग़िब न कर मेरी रूह को 
अरमाँ ये खो गए हैं 
रहने दो चाँद की ज़द अभी 
वो ख़याल सो गए हैं 

तेरी जीत का मेरी हार का 
हर बार का जो है सिलसिला 
है क़रार अहद-ए-ख़िलाफ़ का 
कहाँ ज़ख्म ये नए हैं 

जो दिला रहे तुझे हौसले 
रख उनसे भी कुछ फ़ासिले 
मुझे क्या पता तेरे दिल में वो 
क्या शुबा सा बो गए हैं 

ये इधर उधर की ही बात है 
कभी साथ है कभी मात है 
अब क्या कहें के वो कौनसा 
दुःख अपना रो गए हैं 

Monday, August 26, 2024

बाज़ आएंगे नहीं

मुस्कुराएंगे 
बहल जाएंगे 
आज़माएंगे 
फिर सताएंगे 
वो बुलाएंगे  
हम ना जाएंगे 
यूँ दिखाएँगे 
ख़ार खाएंगे
तिलमिलायेंगे 
रूठ जाएंगे 
दिल दुखायेंगे 
===========
बाज़ आएंगे नहीं 
रंजिश ही सही
===========

Wednesday, July 17, 2024

मारा

किसी को आब ने मारा
किसी को प्यास ने मारा
कोई हसरत में जलता था
किसी को यास ने मारा

किसी को यार ने मारा
किसी को खास ने मारा
उसे तो इल्म भी ना था
जिसे एख़्लास ने मारा

किसी एहसास ने मारा
दिल-ए-उदास ने मारा
कभी दिलबर के बातों की
सर-ए-मिठास ने मारा

कभी तो वस्ल ने मारा
कभी फ़िराक़ ने मारा
कभी परवाने को उसके
दिल ए बकवास ने मारा

किसी को काश ने मारा
किसी को ताश ने मारा
जिसे सांसों की आदत थी
उसी को सांस ने मारा

Friday, June 21, 2024

आब

आसमानों से आता है हर हुनर ​​का ये बानी है (बनाने वाला - architect)

ये सच्ची बात है देखो हर किसी ने ये मानी है

ये अपनी चाल से काटे ज़माने भर की उलझन को

ज़ेहन में याद रख जाए बड़ा ये दास्तानी है


किसी पैग़ाम से मिल कर ये हमदम की निशानी है

इसे जो पढ़ सके कोई तो फिर ये रा'ए ज़ानी है (टिप्पणी - commentary )

कोई भी छोड़ ना पाया अभी तक इस अकेले को

बहुत नायाब है देखो बड़ा ये पास्तानी है (प्राचीन - antique)


जहां पर ये नहीं होता वहां आनी ना जानी है

जहां भी ये बिखर जाए वहां बस शादमानी है (खुशी - joy)

ये हरदम राज करता है महफ़िलों की ये रानी है

बिना इसके बड़ी सूखी बदगुमा मेज़बानी है


इसे दे दो ज़रा इज़्ज़त कोई इसका ना सानी है

ज़िन्दगी जब से चलती है बात इतनी पुरानी है

ये पानी है ये पानी है बड़ा ही खान दानी है

बुढ़ापे में दवा सा है जवानों की जवानी है


हयात-ए-आब पानी है ज़हर की राख पानी है 

ज़िंदगी के लिए पानी मौत के बाद पानी है 

ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है 

ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है 

दिखावा

ये दुनिया है दिखावा 
है दिखावा है दिखावा है

दिखावा है ये दुनिया है 
ये दुनिया बस दिखावा है

दिखावा ही दिखाना है
ज़बर्दस्ती बताना है
नुमाइश है सर-ए-बाज़ार
खुद को बेच खाना है ।। दिखावा है ये ...

असल में जो किया ना हो
उसे कहके जताना है
किसी को चोट पोहचा कर
इनायत कर गिनाना है ।। दिखावा है ये ...

फ़रामोशी है ख़ामोशी
है एहसानों की तकदीरें
मदद लेकर किसी की भी 
सदा को भूल जाना है ।। दिखावा है ये ...

ना ढब कोई रहा हम दर्द
का ना दुश्मनी का ढब
जिन्हे कोसा किया था कल
हाथ उनसे मिलाना है ।। दिखावा है ये ...

रवैया भी दिखावा है
ये पहनवा दिखावा है
यहां काफिर का काफिर गाह
में रहना दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

ये जज़्बाती हुए जाते हैं
सबके सामने देखो
जो आँखों से गिरे जाते हैं 
आँसू भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

मोहब्बत भी दिखावा है
अदावट भी दिखावा है
जुबां की बात को कर के 
दिखाना भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

ये दुनिया है दिखावा 
है दिखावा है दिखावा है

दिखावा है ये दुनिया है 
ये दुनिया बस दिखावा है

Wednesday, June 5, 2024

बदल जाएंगे

ये चाहत ये नफरत ये बेहिस की बातें 
रहेंगे ना दिन ये रहेंगी ना रातें 
बदल जाएंगे रंग इक दिन जहां के 
बदल जाएंगी सारी ये काएनातें 

बदल जाएंगे प्यार के ढंग इक दिन 
बदल जाएंगे नफ़रतों के भी माने
बदल जाएंगे रस्ते तेरे घरों के  
शहर गाँव कस्बे नदी और नाले 
 
ये उलझे से रिश्ते सुलझते नहीं हैं 
वो शर्तें भी अपनी बदलते नहीं हैं 
ये सच है मगर वो समझते नहीं हैं
रहेंगे भी कब तक अभी रहने वाले 

Tuesday, May 14, 2024

जाएज़ा

हर कोई अच्छा भी है सच्चा भी है और है भला 
एक हम बेज़ार ज़ालिम हैं जहन्नम की तरह 

बस ज़मीं पे कुछ लक़ीरें खींच कर कहते हैं लोग 
अब से ये है मुल्क मेरा, मुल्क वो अबसे तेरा 

है ज़रूरी मुस्कुराना एक गुड़िया की तरह 
आग है हर दिल में बस उठता नहीं कोई धुआँ 

हर कोई चाहता है कहना अपनी अपनी दास्ताँ 
सबके अपने ज़ख़्म अपने दर्द, अपने हैं निशाँ  

कुछ शिकन हो तो इबारत का पता चलता भी है 
मौत है शक्लों पे जिनकी कौन दे उनको दवा 

जाएज़ा अपना लिया महसूस दुनिया से हुआ 
सबकी अपनी है जुबां और सबके अपने हैं बयान 

Monday, April 15, 2024

क्या ख़बर है तेरी

और बता क्या ख़बर है तेरी 
आज कैसे याद आ गई मेरी 
तुम तो मसरूफ़ थे अपनी राहों पे 
आज क्यूँ राह मुड़ गई तेरी 

जबसे मंज़िलें तेरे ख्वाबों में हैं 
और बुलंदी तेरे इरादों में हैं 
नज़र तूने इधर नहीं फेरी 
तो आज कैसे याद आ गई मेरी 

कोई काम निकल आया होगा तेरा 
वरना वक़्त तो काफी ज़ाया होगा तेरा 
कहीं तुझे हो तो नहीं रही देरी 
वैसे कैसे याद आ गई मेरी 

अब आये हो तो ज़रा सुकून कर लो 
ताज़ी सी कुछ साँसें ही भर लो 
सफ़र में बोहोत काम आएँगी तेरी 
और बता क्या ख़बर है तेरी 

Tuesday, April 2, 2024

जवाँ

हम तो दुश्मन को गले से ही लगा रखते हैं 
और ऐसे ही हम खुद को जवाँ रखते हैं 

हमने देखा उन्हे या उनने हमको देखा था 
आगे हम तेरे आइनों के बयां रखते हैं 

जब बरसते हैं आग शोले उनकी आँखों से  
हम लतीफ़ा गुदगुदाता सा नया रखते हैं 

दोस्त होता है दोस्ती मे झगड़ने के लिए 
हम कहाँ और किसी से यूं गिला रखते हैं

ज़ख्म नासूर न बन जाए पुराना होकर 
तेरी यादों से इन्हें ताज़ा छिला रखते हैं 

हमको मालूम है दलीलों से तुम न मानोगे
दुश्मनों मे तेरे हम दोस्त मिला रखते हैं 

कितना समझाओगे दुनिया को मियां बस भी करो 
तर्जुमा के लिए हम भी तो जुबां रखते हैं 

Wednesday, March 20, 2024

शोर

शोर, हर तरफ़ शोर 
ख्यालों में, बैठा चित चोर 
भीड़ हो या अकेला पन 
नहीं इसका कोई भी छोर । शोर, हर ... 

किसकी सुनें किस किस की सुनें 
दिल तो बड़ा कन्फूज़ है साला 
इसकी प्रायोरिटी उसकी दिल्लगी 
जैसे हो कोई मकड़ी का जाला 

ट्रैफिक दिमाग का ऐसा है बिखरा 
हो जैसे ये भी बैंगलोर। शोर, हर ... 

टाइम नहीं है इसमें राइम नहीं है 
म्यूज़िक में कहीं कोई चाइम नहीं है 
अरे कितने ही साज़ आवाज़ हैं इसमें 
फिर भी ये दिल मांगे मोर। शोर, हर ... 

चैलेंजेज़ बढ़ते ही जाते हैं 
फूलों के संग कितने कांटे हैं 
तुझको जो जीत ये करनी है हासिल 
चलना नहीं अब तू दौड़ 

शोर, हर तरफ़ शोर 
ख्यालों में, बैठा चित चोर 
भीड़ हो या अकेला पन 
नहीं इसका कोई भी छोर । शोर, हर ... 

Wednesday, March 6, 2024

आवारगी

याद आती जो तेरी तुझसे मिलने आ जाता 
तुम मेरे साथ ही रहते हो तो क्या याद करूँ 
भूल जाने की कोई बात कहाँ बनती है 
याद आते नहीं क्या ये बड़ा सुबूत नहीं 

बात बनती है बनाता हूँ जहां तक हो सके 
मेरी फितरत ही ऐसी है तो मैं क्या ही करूँ 
वैसे चुप रहता हूँ कहता हूँ मैं तो कुछ भी नहीं 
मुझको छेड़ोगे कहने को तो पछताओगे 

मुझे न क़ैद करो मैं कोई परिंदा नहीं 
खुली हवा में साँसों की मुझको आदत है 
बात कहने की हो या फिर हो बात सुनने की 
कोई ना पेश हो सलीके से तो दम घुटता है 

बड़े बेचैन हो रहे हो क्या बात है दोस्त 
तू कलम में भी अगर है तो कोई बात नहीं 
तू अगर चाहे लिख दूँगा तुझे पढूंगा नहीं 
कोई पूछेगा तो कह दूंगा मैं हूँ आवारा  

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...