About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Tuesday, January 28, 2025
खून जलता है
Friday, September 13, 2024
पत्थर
Monday, August 26, 2024
ठग
Thursday, August 22, 2024
क्या मिला
Friday, August 16, 2024
रब
Wednesday, August 14, 2024
बात
Wednesday, July 17, 2024
बिजली
Friday, June 21, 2024
दिखावा
Wednesday, June 5, 2024
मेरा जनाज़ा
खुली जो आँख तो धुंधला सा इक नज़ारा था
इक नये नाम से किसी ने तो पुकारा था
कौन हूँ मैं ये शायद मुझे मालूम था तब
सामने मेरे मगर दस्तूर का निवाला था
कोई तल्ख़ी ना थी मुझको कोई रंजिश भी ना थी
इनसे वाक़िफ़ हुआ जब आईना सम्भाला था
मेरी चाहत ना थी कुछ ना ही आरज़ू थी कोई
इस ज़माने ने मुझे जान के बिगाड़ा था
बेतुकी बात है लेकिन ये रात ख़्वाबों में
देखा कांधों पे मेरे ख़ुद मेरा जनाज़ा था
Monday, May 27, 2024
कुछ बातें
कुछ बातें
तो रह जाती हैं बातों में
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में
धुंधली सी
आँखों की बरसातों में
कुछ बातें
झूमती हैं हवाओं में
रह जाती हैं कुछ बातें
कह जाती हैं कुछ रातें
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते
दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें
कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में
मुझे पागल
बना जाती जज़्बातों से
बड़ी उलझन
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे
हारना तो नहीं मुझे
जीतना भी नहीं मुझे
तो कैसे मैं कहूँ तुझे
कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे
तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें
Tuesday, May 14, 2024
जाएज़ा
Sunday, May 5, 2024
सवाल
Tuesday, April 30, 2024
वेहम
Monday, April 22, 2024
साक़ी
Friday, April 19, 2024
प्यास आँखों की
Friday, April 12, 2024
किताबी फूल
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो
लिखता है कहानी तो लिख कर तू भूल जा
खुद को ही कहानी का किरदार मत करो
थोड़ा तो आज़मा लो कहते हैं तजरुबे
एक तरफ़ा कभी प्यार बे शुमार मत करो
खायेगा फिर से धोखा अगर प्यार करेगा
खुद से ही अब खुद को गद्दार मत करो
कमज़ोर सा ये दिल है, है ये मोम से बना
अंगार से जला के तार तार मत करो
इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो
करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो
एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
Wednesday, April 10, 2024
बिसरी सी महक
Sunday, April 7, 2024
नमी
[चश्मे सराब = like mirage], [ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]
[शबाब = youth]
[हबाब = bubble]
[जुस्तजू = desire]
Friday, April 5, 2024
बेचैन
तू कौन है
तू कहाँ पे है
तू दिल में है
या जाँ में है
तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
तुझे आशकी में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
तुझे खुशबुओं में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
तुझे होश में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा
दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
आवाज़ में नहीं है नाखून मे नहीं है
तू किताब में नहीं है मजमून में नहीं है
तू जुनून में नहीं है तू सुकून में नहीं है
फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल
तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
Thursday, March 7, 2024
बेसबब
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...