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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Tuesday, January 28, 2025

खून जलता है

इक तो अल्फ़ाज़ तराशी से खून जलता है
उसपे बेनाम तराशी से खून जलता है
[दाग़ बेदाग़ तराशी = Judge karna, अल्फ़ाज़ तराशी = Gyan dena]

जिनको बस अर्ज़ ग़ुज़ारी ही रास आती है
उनकी इल्ज़ाम तराशी से खून जलता है
[अर्ज़ ग़ुज़ारी = chaatukarita/chamcha giri, इल्ज़ाम तराशी = ungli dikhaana]

अहलियत आज दिखा दो तो बात मानेंगे
नस्ली अंदाज तराशी से खून जलता है
[अहलियत = ability, नस्ली अंदाज के पाशी = racist commenter]

बेझिझक कह दे तुझे बात जो भी कहनी है
बात के बीच राशी से खून जलता है
[ख़राशी = irritation /गला साफ़ करने की प्रक्रिया ]

जो हिफ़ाज़त ही बताते तो कोई बात न थी
यूँ हि बे बात तलाशी से खून जलता है

लो गला घोंट दिया मैंने अपने ख़ाबों का
इस पे 'ज़ाहिर' कि शबाशी से खून जलता है

हमको मालूम है मज़मून क्या लिखा तुमने
पर लिफ़ाफ़े कि नकाशी से खून जलता है

खून जलता है यही सोचकर कहूँ अब क्या
और कुछ कहना न हो तो भी खून जलता है


Friday, September 13, 2024

पत्थर

Behr (2122 121 222)

After learning Behr Grammar

लख्त-ए-खूँ है ये रेत कर देखो 
कैफ़ियत है समेट कर देखो
लाल रंग का है इसमें लावा सा 
अपने हाथों से छेड़ कर देखो
[लख्त-ए-खूँ = blood clot, कैफ़ियत = kahaani)

क्या है के ज़िन्दगी तो नाटक है
और किरदार सबके आवारा
हर दफा तुम ही क्यूं बनो क़ातिल
इक दफ़ा मौत का भी डर देखो

देख ताज़ा हवा के ये झोंके 
शोर करते हैं ये तुझे होके 
दिल में लहरों सी गुदगुदी होगी 
एक पत्थर तो फ़ेंक कर देखो 


======================

Before learning behr Grammar

लख्त-ए-खूँ है रेत कर देखो 
ये कैफ़ियत समेट कर देखो 
चोट दिल पर है नुमाइश के लिए 
आओ आ जाओ कुरेद कर देखो 
[लख्त-ए-खूँ = blood clot, कैफ़ियत = kahaani, नुमाइश  = exhibition]

फिर किसी का दिलरुबा होना 
मेरी वफ़ा का बेवफ़ा होना 
अपने दिल की ख्वाहिशों के लिए 
इक दफ़ा तुम फ़रेब कर देखो 
चोट दिल पर है नुमाइश के लिए 
आओ आ जाओ कुरेद कर देखो 

देख ताज़ा हवा के ये झोंके 
शोर करते हैं ये तुझे होके 
दिल में लहरों सी गुदगुदी होगी 
एक पत्थर तो फ़ेंक कर देखो 
चोट दिल पर है नुमाइश के लिए 
आओ आ जाओ कुरेद कर देखो 

Monday, August 26, 2024

ठग

Bahr: 221 2122 221 2122

दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन 
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है

इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना 
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है  

कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की 
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है 

ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी 
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है 

ये रासते ठिकाना पहचान के हैं मेरे 
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है 



=========


दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 
करना तेरा वज़ाहत लाज़िम है यार लेकिन 
आँखें तुम्हारी पढ़ कर कुछ और लग रहा है 

इस बार कुछ न कहना बस बात मेरी सुनना 
हर बार की तरह ये बेकार लग रहा है 

कितने ही शायरों ने शब्बाब-ए-ज़िंदगी की 
हब्बाब ज़िंदगी का कुछ और लग रहा है 

ज़ाहिर सी बात है ये मालूम है मुझे भी 
बातों से मेरी उनको कुछ और लग रहा है 

ये जगह ये ठिकाना पहचान के हैं मेरे 
आते थे हम यहाँ पर अक्सरहाँ लग रहा है 

दुश्वारियों का मौसम बिलकुल अलग रहा है 
बातों की बात ये के कोई तो ठग रहा है 

Thursday, August 22, 2024

क्या मिला

क्या मिला क्या मिला 
करके ये क्या मिला 
है कैसी किस जहां की
तेरी अय्याशियां 

क्या मिला क्या मिला 
करके ये क्या मिला 

इंसानों में बसे हो 
हैवानों की तरह 
और बातें कर रहे हो 
देवताओं की तरह 

क्या मिला क्या मिला 
ये बता दो क्या मिला 
एक नन्ही चिड़िया को  
तुझे रौंद के क्या मिला 

क्या मिला क्या मिला 
करके ये क्या मिला 

कितना है बदगुमां तू 
किस मिट्टी का बना तू 
कातिल है रहमतों का 
और बनता रहनुमा तू 
फरमान दे रहा है 
ना फरमानों की तरह 

क्या मिला क्या मिला 
इक फूल को कुचल कर 
क्या मिला क्या मिला

क्या मिला क्या मिला 
करके ये क्या मिला 

तेरी तो मिलकियत है 
अपनी क्या हैसियत है 
लाचारों को मिटाना 
क्या ये ही इंसानियत है 
सदमों से घिर चुके हम 
हैरानों की तरह 

क्या मिला क्या मिला 
करके ये क्या मिला 
हम सब पे ज़ुल्म ढा कर  
क्या मिला क्या मिला 

Friday, August 16, 2024

रब

Bahr" 
  • 1222
  • 1222
  • 1222
  • 1222

  • समझने की जो बातें थी उन्हें मैं बद समझ बैठा 
    जो गिरहन का अँधेरा था उसे मैं शब् समझ बैठा 

    पहन कर मुस्कराहट सब यहाँ बाहर निकलते हैं 
    मैं बाज़ारू तवज्जोः को लिहा ज़ो दब समझ बैठा 

    क्या मैं मासूम था या फिर ये मेरी बेवक़ूफ़ी थी 
    किसी का हाथ देखा तो उसे मैं हद समझ बैठा 

    यहाँ इंसान चूहों की तरह दौड़ाए जाते हैं 
    हर इक इंसान लालच में तलब से दौड़ने बैठा 

    उन्हें कहना उन्हें सुनना बड़ा पेचीदा लगता है 
    के उनकी बात नाहक़ ही मैं कब से सच समझ बैठा 

    वो माली का जो बेटा है बड़ा नादान बच्चा है 
    जिसे देखा बड़ी गाड़ी में बस साहब समझ बैठा

    यही मैं सोचता हूँ के कहाँ और कब समझ बैठा 
    बना कर के मशीनें खुद को इंसां रब समझ बैठा  

    बड़े नुस्खे नहीं थे ज़िन्दगी में कामयाबी के
    बड़ी छोटी सी ख्वाहिश थी जिसे मैं सब समझ बैठा

    ======================================






    समझने की जो बातें थी उन्हें गलत समझ बैठा 
    जो गिरहन का अँधेरा था उसे मैं शब् समझ बैठा 

    मुस्कराहट पेहेन कर सब यहाँ बाहर निकलते हैं 
    मैं बाज़ारू तवज्जोः को लिहाज़ अदब समझ बैठा 

    क्या मैं मासूम था या फिर ये मेरी बेवक़ूफ़ी थी 
    किसी का हाथ देखा तो उसे मदद समझ बैठा 

    यहाँ इंसान चूहों की तरह दौड़ाए जाते हैं 
    हर इक इंसान लालच में दौड़ने को तलब बैठा 

    उन्हें कहना उन्हें सुनना बड़ा पेचीदा लगता है 
    के उनकी बात नाहक़ ही मैं कब से सच समझ बैठा 

    एक बेटा है माली का बड़ा नादान बच्चा है 
    गाड़ियों में जिन्हें देखा उन्हें साहब समझ बैठा 

    यही मैं सोचता हूँ के कहाँ और कब समझ बैठा 
    बना कर के मशीन इंसान खुद को  रब समझ बैठा 
     
    पूछते हैं लोग अक्सर कामयाबी के कुछ नुस्खे 
    बड़ी छोटी सी ख्वाहिश थी जिसे मैं सब समझ बैठा

    Wednesday, August 14, 2024

    बात

    बहरों के सामने तू आवाज़ क्या करेगा 
    ख़ुद उड़ सके न उनको आज़ाद क्या करेगा 

    चादर को ओढ़ते हैं अपना क़फ़न समझ कर 
    तू उनसे ज़िन्दगी की फ़रियाद क्या करेगा 

    इल्ज़ाम हर किसी पर लाज़िम नहीं है क्यों कि  
    जो साथ ही नहीं था वो याद क्या करेगा 

    मायूस है वो मुझसे ये सोच कर के मेरी 
    बर्बाद ज़िन्दगी को बर्बाद क्या करेगा 

    रेहमत उसे न बक्शो वेह्शी है वो दरिंदा 
    पहले ही मर चुका है जल्लाद क्या करेगा 

    साँसें ये चल रही हैं कह दे तू जो है कहना 
    जो सांस रुक गई तो फिर बात क्या करेगा 

    Wednesday, July 17, 2024

    बिजली

    आज फिर बारिश हुई 
    फिर भी हम रोए नहीं 
    रात भर बिजली गिरी 
    और हम सोए नहीं 

    करवटों से सिलवटें 
    रात भर बढ़ती रही 
    फैसलों के वास्ते 
    हम कहीं खोए नहीं 

    ये भी कैसी बात है जो 
    लफ़्ज़ में ढलती नहीं 
    अपने दामन मुह छुपाकर 
    कबसे हम रोए नहीं 

    ये भी सच है इस में तेरी 
    और मेरी गलती नहीं 
    रात भर बिजली गिरी 
    और हम सोए नहीं 

    आज फिर बारिश हुई 
    फिर भी हम रोए नहीं 
    रात भर बिजली गिरी 
    और हम सोए नहीं 

    Friday, June 21, 2024

    दिखावा

    ये दुनिया है दिखावा 
    है दिखावा है दिखावा है

    दिखावा है ये दुनिया है 
    ये दुनिया बस दिखावा है

    दिखावा ही दिखाना है
    ज़बर्दस्ती बताना है
    नुमाइश है सर-ए-बाज़ार
    खुद को बेच खाना है ।। दिखावा है ये ...

    असल में जो किया ना हो
    उसे कहके जताना है
    किसी को चोट पोहचा कर
    इनायत कर गिनाना है ।। दिखावा है ये ...

    फ़रामोशी है ख़ामोशी
    है एहसानों की तकदीरें
    मदद लेकर किसी की भी 
    सदा को भूल जाना है ।। दिखावा है ये ...

    ना ढब कोई रहा हम दर्द
    का ना दुश्मनी का ढब
    जिन्हे कोसा किया था कल
    हाथ उनसे मिलाना है ।। दिखावा है ये ...

    रवैया भी दिखावा है
    ये पहनवा दिखावा है
    यहां काफिर का काफिर गाह
    में रहना दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    ये जज़्बाती हुए जाते हैं
    सबके सामने देखो
    जो आँखों से गिरे जाते हैं 
    आँसू भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    मोहब्बत भी दिखावा है
    अदावट भी दिखावा है
    जुबां की बात को कर के 
    दिखाना भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    ये दुनिया है दिखावा 
    है दिखावा है दिखावा है

    दिखावा है ये दुनिया है 
    ये दुनिया बस दिखावा है

    Wednesday, June 5, 2024

    मेरा जनाज़ा

    खुली जो आँख तो धुंधला सा इक नज़ारा था 

    इक नये नाम से किसी ने तो पुकारा था 


    कौन हूँ मैं ये शायद मुझे मालूम था तब 

    सामने मेरे मगर दस्तूर का निवाला था 


    कोई तल्ख़ी ना थी मुझको कोई रंजिश भी ना थी 

    इनसे वाक़िफ़ हुआ जब आईना सम्भाला था 


    मेरी चाहत ना थी कुछ ना ही आरज़ू थी कोई 

    इस ज़माने ने मुझे जान के बिगाड़ा था 


    बेतुकी बात है लेकिन ये रात ख़्वाबों में 

    देखा कांधों पे मेरे ख़ुद मेरा जनाज़ा था 

    Monday, May 27, 2024

    कुछ बातें

    कुछ बातें 
    तो रह जाती हैं बातों में 
    जो खुद से ही
    कभी कहते हैं रातों में 

    धुंधली सी
    आँखों की बरसातों में 
    कुछ बातें 
    झूमती हैं हवाओं में 

    रह जाती हैं कुछ बातें 
    कह जाती हैं कुछ रातें 
    और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते 

    दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें 

    कुछ बातें
    याद आती सन्नाटों में 
    मुझे पागल 
    बना जाती जज़्बातों से

    बड़ी उलझन 
    शिकस्तों से और मातों से
    हैं कुछ बातें
    अटक जाती हैं नातों मे 
     
    हारना तो नहीं मुझे 
    जीतना भी नहीं मुझे 
    तो कैसे मैं कहूँ तुझे 

    कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे 

    तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें

    Tuesday, May 14, 2024

    जाएज़ा

    हर कोई अच्छा भी है सच्चा भी है और है भला 
    एक हम बेज़ार ज़ालिम हैं जहन्नम की तरह 

    बस ज़मीं पे कुछ लक़ीरें खींच कर कहते हैं लोग 
    अब से ये है मुल्क मेरा, मुल्क वो अबसे तेरा 

    है ज़रूरी मुस्कुराना एक गुड़िया की तरह 
    आग है हर दिल में बस उठता नहीं कोई धुआँ 

    हर कोई चाहता है कहना अपनी अपनी दास्ताँ 
    सबके अपने ज़ख़्म अपने दर्द, अपने हैं निशाँ  

    कुछ शिकन हो तो इबारत का पता चलता भी है 
    मौत है शक्लों पे जिनकी कौन दे उनको दवा 

    जाएज़ा अपना लिया महसूस दुनिया से हुआ 
    सबकी अपनी है जुबां और सबके अपने हैं बयान 

    Sunday, May 5, 2024

    सवाल

    छोटी सी बात का यूँ वबाल नहीं होता 
    सवाल का जवाब गर सवाल नहीं होता 
    कह देते कुछ भी, मलाल नहीं होता 
    सवाल का जवाब गर सवाल नहीं होता 

    कोई सोचे भी तो कैसे अपने जुर्म की रवानी 
    अपनी नज़रों में कोई गुनेहगार नहीं होता 
    सवाल का जवाब गर सवाल नहीं होता 

    तुम वक़्त लोगे सोचोगे समझोगे फिर कहोगे 
    सच तो है दिल की बात में ख़याल नहीं होता 
    सवाल का जवाब गर सवाल नहीं होता 

    वादों की बात कहकर बात आधी रह गई थी 
    इतनी आसानी से ऐसा कमाल नहीं होता 
    सवाल का जवाब गर सवाल नहीं होता 

    Tuesday, April 30, 2024

    वेहम

    जो हकीक़त है वो ख़ाबों के लिए खोते हैं 
    ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 
    असल में खाब का अंजाम ऐसा होता है 
    दौड़ते भागते हम जागते न सोते हैं 

    ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

    किसी के हैं बोहोत किसी के ख़ाब थोड़े हैं 
    कौन बिखरे हुए ख़ाबों को फिर से जोड़े है 
    हर कोई देखता ज़रूर है मगर फिर भी 

    ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

    ख़ाब इक प्यास है हकीक़त से नहीं मिटती 
    वो कहानी है जो किसी से भी नहीं मिलती 
    ये वेहम उम्र भर हम शाम-ओ सहर बोते हैं 

    ख़ाब तो ख़ाब हैं पूरे ये कहाँ होते हैं 

    Monday, April 22, 2024

    साक़ी

    रिश्ते तमाम हैं पर मिलता कोई नहीं 
    ग़लती से मिल भी जाए तो जुड़ता कोई नहीं 
    दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
    सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
    [साक़ी = one who serves drinks / शराब पेश करने वाले]

    रिश्तों की आस खून के क़तरों से कहाँ है 
    दुनिया में वो भी ख़ुश हैं जिनका कोई नहीं 

    कैसी ये चोट दी है क्या दिल का हाल है 
    के ज़ख्म तो गहरा है निशाँ कोई नहीं 

    कैसा ये शहर तेरा रहते कहाँ हैं लोग 
    रस्ते तमाम हैं यहाँ मकां कोई नहीं 

    दिल डूबता है लेकिन देखो ये बेबसी 
    नज़दीक यहाँ मेरे तिनका कोई नहीं

    इस शोर शराबे में किससे कहे कोई 
    सब बोलते हैं अपनी सुनता कोई नहीं

    दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
    सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं

    Friday, April 19, 2024

    प्यास आँखों की

    तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
    तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
    तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
    प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

    सब्र कर लेंगे क़यामत का और क़िस्मत का 
    तुझको ऍ दोस्त हम दोस्ती सिखा देंगे 

    राह में तेरी हम ऐसे मुंतज़िर होंगे 
    दिल को धड़कते ही रहने की हम सज़ा देंगे 

    आईना उम्र की दहलीज़ें जब दिखाएगा 
    घर से अपने हम हर आईना हटा देंगे 

    इस दफ़ा ना सही लेकिन ये तो होगा इक दिन 
    तुझको हर हाल मे हम बस अपना बना लेंगे 

    तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे 
    तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे 
    तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है 
    प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे 

    Friday, April 12, 2024

    किताबी फूल

    करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
    एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो
    इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
    ख़ता ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 

    लिखता है कहानी तो लिख कर तू भूल जा 
    खुद को ही कहानी का किरदार मत करो 

    थोड़ा तो आज़मा लो कहते हैं तजरुबे  
    एक तरफ़ा कभी प्यार बे शुमार मत करो 

    खायेगा फिर से धोखा अगर प्यार करेगा 
    खुद से ही अब खुद को गद्दार मत करो 

    कमज़ोर सा ये दिल है, है ये मोम से बना 
    अंगार से जला के तार तार मत करो 

    इक बार में ही सीख लो तुम कर के ये ख़ता
    ख़ता 
    ये ज़िन्दगी में बार बार मत करो 
    करो मुहब्बत तुम लेकिन कभी इज़हार मत करो 
    एक फूल क़िताबों में बेकार मत करो

    Wednesday, April 10, 2024

    बिसरी सी महक

    धूप आती है तो बारिश भी साथ लाती है 
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
    बाद बारिश के यहाँ बाढ़ सी आ जाती है  
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

    निशाँ कुछ भी तो नहीं 
    निशाँ कुछ भी तो नहीं 
    निशाँ कुछ भी तो नहीं हैं तेरे अब इस घर में  
    वो जगहा खाली तेरे गीत गुनगुनाती है 
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

    नींद आती है बोहोत 
    नींद आती है बोहोत 
    थकन से सारे दिन के नींद तो आती है बोहोत 
    कोई घुँघरू की छनक रात भर जगाती है 
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है 

    भूलना है तुझे 
    भूलना है तुझे 
    भूलना है तुझे ये कह के भूल जाता हूँ  
    तेरी यादें क्या मेरी उम्र भर का साथी है 
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

    मुट्ठियाँ बंद करूँ 
    मुट्ठियाँ बंद करूँ 
    मुट्ठियाँ बंद करूँ कुछ भी ना माँगूँ रब से 
    कोई बिसरी सी महक याद कुछ दिलाती है  
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है
    न जाने कैसे दिल को तेरी याद आती है

    Sunday, April 7, 2024

    नमी

    मेरे चेहरे से न तू पढ़ मुझे 
    मेरा चेहरा जिल्द-ए-किताब है 
    मेरी ज़िन्दगी के सफ़े पलट 
    फिर पूछ जो भी सवाल हैं 
    [जिल्द-ए-किताब = book cover], [सफ़े = pages]

    न करो ये दिखने की कोशिशें 
    यहाँ दिखना चश्मे सराब है 
    तेरी रौशनी को ख़बर नहीं 
    यहाँ ज़ुल्मतों के हिजाब हैं 
    [चश्मे सराब = like mirage], [
    ज़ुल्मतों के हिजाब = cover of darkness]

    मेरे ज़ख्म का ना हिसाब ले 
    मेरे ज़ख्म तो बे-हिसाब हैं 
    तू कहे तो और सवाँर लूँ 
    मेरे ज़ख्म मेरा शबाब है
    [
    शबाब = youth]

    कोई कह रहा था के ज़िन्दगी 
    एक ला जवाब सा ख़्वाब है 
    इस ख्वाब में सच कुछ नहीं 
    और जिस्म सारे हबाब हैं
    [
    हबाब = bubble]

    क्या कहूं मैं कैसे कहूं उसे 
    मुझे दिखता कैसा ये ख़्वाब है 
    कहीं नम सी आँख में खून है 
    कहीं जुस्तजू में शराब है
    [
    जुस्तजू = desire]

    Friday, April 5, 2024

    बेचैन

    तू कौन है 
    तू कहाँ पे है

    तू दिल में है
    या जाँ 
    में है
    तुझे चाहता हूँ देखूँ आँखों से इक दफ़ा 

    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा
    तू कौन है कहाँ है किस देस मे बसा
    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

    तू मुझे तो जानता है अपना तू दर बता
    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

    तुझे सागरों में ढूंढा तुझे आसमा में ढूंढा
    तुझे आशकी  
    में ढूंढा तुझे बंदगी में ढूंढा
    तुझे खुशबुओं 
    में ढूंढा खामोशियों में ढूंढा
    तुझे होश 
    में भी ढूंढा बेहोशियों में ढूंढा 

    दिखता नहीं कहीं तू ढूंढा है कहकशा
    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

    मेरी सांस में नहीं है मेरे खून में नहीं है
    आवाज़ 
    में नहीं है नाखून मे नहीं है 
    तू किताब 
    में नहीं है मजमून में नहीं है 
    तू जुनून 
    में नहीं है तू सुकून में नहीं है

    फिर भी न जाने कैसे महसूस है किया
    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा

    तेरी चाहतों में पागल तेरी ख्वाहिशों में घायल
    दरिया से सूख कर मैं अब बन गया हूँ बादल
    दीदार के लिए ही मैं तड़प रहा हूँ पल पल
    तड़प रहा हूँ पल पल तड़प रहा हूँ पल पल

    तू किसी को भी दिखा है या मुझे न दिख सका
    बेचैन कर रहा है तेरी दीद का नशा


    Thursday, March 7, 2024

    बेसबब

    ऐ ख़ुदा हमको ये फिर से किस जनम का सिला दिया 
    मौत मांगी थी मगर फिर ज़िन्दगी से मिला दिया 
    हम तो रोते थे के क्यों फिर आ पड़े इस जहान में 
    और लोगों ने हमें पुचकार के कुछ पीला दिया 

    होश जब आया जहां ने क्या न जाने सिखा दिया 
    जो भी सीखा था कभी मैंने वो सब कुछ भुला दिया 
    झूठ सच और प्यार नफ़रत शान-ओ-शौक़त एहमियत 
    डाल कर मुझमें ये बातें ज़ोर से फिर हिला दिया 

    क्या खता मुझसे हुई थी ज़िन्दगी के खेल में 
    क्या परख लेनी थी तुझको इस तरह की जेल में 
    जब समझ आने लगी थी वो तेरे दर की ख़ुशी 
    क्यों भुला कर इस जहां में बेसबब ही बिठा दिया 

    ख़ामोशी

    ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...