About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Saturday, July 13, 2024
ख़ुश्बू (नज़्म)
Monday, June 17, 2024
मन कंगन
Tuesday, June 4, 2024
बस इक दफ़ा
Friday, April 26, 2024
रूठना तेरा
Tuesday, April 9, 2024
सदा
Saturday, April 6, 2024
मार डाला
Friday, March 22, 2024
लाचारी
Friday, March 8, 2024
रूह अफ़्ज़ा
Thursday, February 29, 2024
नशा
Monday, February 26, 2024
नज़र
दिल धड़कना भी सीख जाएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
पीछे पीछे ही चले आएंगे
तुम अगर इक नज़र ही देख लो
Friday, February 23, 2024
किश मिश
ज़िन्दगी में कभी ऐसी
फिर से आतीश नहीं होती (आतिश = light)
तुझको पा ही लेते गर हम
फिर ये ख़्वाहिश नहीं होती (ख़्वाहिश = desire)
इश्क़ में बादल बारिश की
आज़माइश नहीं होती (आज़माइश = test)
शायरी फिर भी कर लेता
ऐसी कोशिश नहीं होती
तू अगर मेरे ख़्वाबों में
सारी गर्दिश नहीं होती (गर्दिश = rotation, everywhere)
शेर तुझपे तो पढ़ देता
ऐसी लर्ज़िश नहीं होती (लर्ज़िश = vibrato)
सोच अपने सफर में गर
ऐसी बंदिश नहीं होती (बंदिश = restriction)
खीर में सब कुछ तो होता
मगर किश मिश नहीं होती
Saturday, February 17, 2024
कोहिनूर
हुस्न तेरा ये कोहिनूरी है
अब्र की शिद्दतें भी पूरी हैं .... (अब्र = बादल, शिद्दत = intensity)
दिल संभाले तो कोई कैसे बता
कुछ तो कहना तुझे ज़रूरी है
ये चमक है तेरा सुरूर-ए-नशा .... (सुरूर = toxic)
आँख तेरी ये चश्म-ए-नूरी है .... (चश्म-ए-नूरी = प्रकाश सी नज़र )
देख अपनी नज़र को देख ज़रा
देख इनको ये भूरी भूरी हैं
मुस्कराहट से काम चलता है
रुख़ पे तेरे हंसी अधूरी है (रुख़ = चेहरा)
मिलने आये हो कुछ तो बात करो
बात करना भी तो ज़रूरी है
कुछ भी करवा ले आज तेरा शबाब
आज की रात भी सिन्दूरी है
इम्तेहां लोगे कोई बात नहीं
हाथ कंगन को कितनी दूरी है
बात की बात भूलने वाले
झूठ इतना भी क्या ज़रूरी है
बक़्श दो अर्ज़ मेरे शेरों को
मेरी ग़ज़ल अभी अधूरी है
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...