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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Sunday, April 14, 2024

तुम क्या कर रही हो अभी

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

क्या तूने मुझको याद किया 
या फिर तू मुझको भूल गया 
क्यूँ लगता है मन को ये पिया  
तू खुद पूछेगा नहीं ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
बस यूँही बात कर लो कभी 

सारा दिन कैसे निकलेगा 
दिल ख़ाब ये तेरे देखेगा 
तेरा पैग़ाम ये आएगा 
पूछेगा फिर तू यही ... के 

तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो मुझसे तो कभी 

अच्छा लगता है पूछते हो 
मुझको यूँ समझते बूझते हो 
दिल की बातें तुम जानते हो 
मेरे हमदम हो तभी 

बस यूँही बात कर लो कभी 
तुम क्या कर रही हो अभी 
पूछो ना फिर से अभी
तुम क्या कर रही हो अभी 

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...