About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Friday, June 28, 2024
फिर वो बात हो
Wednesday, June 26, 2024
हुजूम
Saturday, June 22, 2024
गुलशन
Friday, June 21, 2024
आब
आसमानों से आता है हर हुनर का ये बानी है (बनाने वाला - architect)
ये सच्ची बात है देखो हर किसी ने ये मानी है
ये अपनी चाल से काटे ज़माने भर की उलझन को
ज़ेहन में याद रख जाए बड़ा ये दास्तानी है
किसी पैग़ाम से मिल कर ये हमदम की निशानी है
इसे जो पढ़ सके कोई तो फिर ये रा'ए ज़ानी है (टिप्पणी - commentary )
कोई भी छोड़ ना पाया अभी तक इस अकेले को
बहुत नायाब है देखो बड़ा ये पास्तानी है (प्राचीन - antique)
जहां पर ये नहीं होता वहां आनी ना जानी है
जहां भी ये बिखर जाए वहां बस शादमानी है (खुशी - joy)
ये हरदम राज करता है महफ़िलों की ये रानी है
बिना इसके बड़ी सूखी बदगुमा मेज़बानी है
इसे दे दो ज़रा इज़्ज़त कोई इसका ना सानी है
ज़िन्दगी जब से चलती है बात इतनी पुरानी है
ये पानी है ये पानी है बड़ा ही खान दानी है
बुढ़ापे में दवा सा है जवानों की जवानी है
हयात-ए-आब पानी है ज़हर की राख पानी है
ज़िंदगी के लिए पानी मौत के बाद पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
दिखावा
Tuesday, June 18, 2024
माटी
Monday, June 17, 2024
मन कंगन
Saturday, June 15, 2024
फ़ना
Tuesday, June 11, 2024
बे होश
इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
हम हैं बे होश चलो मान लिया
ये बता होश कैसे आएगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
कह तो दी थी बात आँखों ने
और कितना इन्हें रुलाएगा
... ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
वो मुसाफ़िर है अपनी राहों का
शक्ल शायद ही अब दिखायेगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
फ़िक्र क्यूँ है के कुछ भी मिल ना सका
कुछ नहीं है तो क्या गवाएगा
... इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
ज़ख्म है, ये तो भर ही जाएगा
इतना सोचेगा तो क्या पाएगा
Monday, June 10, 2024
बात नाज़ुक है
Friday, June 7, 2024
ईंधन
Wednesday, June 5, 2024
मेरा जनाज़ा
खुली जो आँख तो धुंधला सा इक नज़ारा था
इक नये नाम से किसी ने तो पुकारा था
कौन हूँ मैं ये शायद मुझे मालूम था तब
सामने मेरे मगर दस्तूर का निवाला था
कोई तल्ख़ी ना थी मुझको कोई रंजिश भी ना थी
इनसे वाक़िफ़ हुआ जब आईना सम्भाला था
मेरी चाहत ना थी कुछ ना ही आरज़ू थी कोई
इस ज़माने ने मुझे जान के बिगाड़ा था
बेतुकी बात है लेकिन ये रात ख़्वाबों में
देखा कांधों पे मेरे ख़ुद मेरा जनाज़ा था
बदल जाएंगे
साधू साधो साधना
साधू साधो साधना
श्वासों से आराधना
ज्ञान ज्ञानी से बड़ा
करुणा प्रेम आत्मा
साधू साधो साधना
अनुशासन और योजना
लक्ष्य अपने बांधता
तप कर देवी अर्चना
हे लक्ष्मी हे शारदा
साधू साधो साधना
जीवन एक द्वन्द्व है
विचारों से अनुबंध हैं
करुणा दया ही धर्म है
साधू की आराधना
साधू साधो साधना
श्वासों से आराधना
ज्ञान ज्ञानी से बड़ा
करुणा प्रेम आत्मा
साधू साधो साधना
Tuesday, June 4, 2024
बस इक दफ़ा
Monday, June 3, 2024
ख़ुमार-ए-इश्क़
Sunday, June 2, 2024
मन ख़ानाबदोश है
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
-
सब है पराया रख ना क्या है ग़म हैं किसी के अ पना क्या है उम्र गुज़ारी खुल गई आँखें उम्र गुज़ारी अब जागा हूँ उम्र गुज़ारी त...
-
तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं न कैद ही किया मुझको न ही रियाह ...
-
जब कभी तेरा ख़याल आता है जाने क्या दिल को हुआ जाता है वक़्त ठहरा हुआ सा लगता है तू मेरे दिल में समा जाता है ग़ैर लगती है ये दुनिया मुझ को तू सग...