About Me

My photo
I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Showing posts with label 11212-11212-11212-11212. Show all posts
Showing posts with label 11212-11212-11212-11212. Show all posts

Thursday, November 28, 2024

ख़याल

Bahr: 11212-11212-11212-11212

जो ज़हन गिरफ़्त मलाल थे
        कभी आसुओं में वो बह गए
जो क़लम किये थे ख़याल हमने 
        किसी किताब में रह गए
[ज़हन गिरफ़्त = hidden in mind]

वो निशानियाँ वो इनायतें 
        तेरी याद से तो मिले मगर
वो जो पल गुज़ारे थे साथ में 
        वो उसी मक़ाम पे रह गए
[इनायतें = respects]

जो भी कहना था वो ना कह सके 
        यूँ के हम भी ऐसे अजीब थे
यूँ के तुम भी कैसे अजीब थे 
        जो ना कहना था वोही कह गए

इसे प्यार हम ना कहें तो फिर 
        ये बता ज़रा इसे क्या कहें
तेरी ताकिदों के लिहाज़ में 
        बिलिहाज बात भी सह गए
[ताकिदों = warnings]

तेरा साथ थी मेरी जुस्तजू 
        मगर इत्तफ़ाक़ की बात है
तेरी जुस्तजू में चले थे हम 
        तेरी जुस्तजू में ही रह गए
[जुस्तजू = aspirations]
 
जो ज़हन गिरफ़्त मलाल थे
        कभी आसुओं में वो बह गए
जो क़लम किये थे ख़याल हमने 
        किसी क़िताब में रह गए

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...