About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Wednesday, February 19, 2025
ख़ामोशी
Thursday, February 13, 2025
क्या कहूँ
बे बूझ सवालों में हूँ कब से फँसा कहूँ
आता नहीं समझ के किसे बे तुका कहूँ
इतने हैं रहनुमा यहाँ के सोचता हूँ मैं
किससे मैं आँख फेर लूँ किसको ख़ुदा कहूँ
ग़म दिल में बस रहा है और दिल पे बस नहीं
ख़ुद को मैं दिल शुदा कहूं के ग़म शुदा कहूँ
कितना क़रीब है तू मेरे क्या कहूँ मैं अब
बातों ने तेरी मुझको है कितना छुआ कहूँ
जीता हूँ मैं यहाँ कभी मरने के लिए ही
कितना मैं जी चुका कहूँ कितना मरा कहूँ
आँखें तलाशती हैं कोई ख़ुद सा अजनबी
कब तक मैं आइने को भला अब बुरा कहूँ
अफ़्सुर्द हाल दिल का हुआ बाद तेरे मैं
घायल हुआ हूँ कितना मैं कितना बँटा कहूँ
करता हूँ शौक़ से मेरी बर्बादी का हिसाब
लूटा है तूने कितना मैं कितना लुटा कहूँ
जिस बात का था डर मुझे उसके उलट हुई
शुक्रे ख़ुदा कहूँ इसे माँ की दुआ कहूँ
चुभती थी तेरी याद तेरे प्यार की सदा
दिल टूटने पे था मेरा कितना दुखा कहूँ
बादल की शक्ल अश्क़ भी आँखों में आ गये
कितना है इसमें कोहरा तो कितना धुआँ कहूँ
यारों ने तेरे नाम से ताने बहुत दिये
कल रात बज़्म में हुआ कितना मज़ा कहूँ
'ज़ाहिर' को मैं सुनाऊँ ग़ज़ल या क़ता कहो
क्या क्या नहीं है तुझपे लिखा क्या यहाँ कहूँ
Wednesday, February 12, 2025
दिन आ रहे हैं
आहट
Sunday, February 9, 2025
सुख़न
आदमी ज़ोफ़-ए-तन देख सकता नहीं
रश्क अह्ल-ए-सुख़न देख सकता नहीं
है अना वो बला सर पे चढ़ जाये तो
पैरहन पैरहन देख सकता नहीं
[ज़ोफ़-ए-तन = weakness of body, रश्क = jealousy, अह्ल-ए-सुख़न = poet, अना = ego, पैरहन = clothes]
देखते हैं सभी आईना पर कोई
आइने की घुटन देख सकता नहीं
जो मुझे दिख रहा है यहाँ से अभी
कोई ये अंजुमन देख सकता नहीं
[अंजुमन = नज़ारा]
अब्र ने चाँद को ढँक लिया अब कोई
चाँदनी की किरन देख सकता नहीं
[अब्र = बादल]
जो भी है बुत कदा और है ना ख़ुदा
वो मेरा फ़िक्र-ओ-फ़न देख सकता नहीं
[बुत कदा = जिसे सब कुछ पता हो, ना ख़ुदा = नास्तिक, फ़िक्र-ओ-फ़न = विचारों की कलाकारी]
जब से अपनों ने है मुझको रूखसत किया
मैं ये अपना बदन देख सकता नहीं
[ज़मीं-दोस्त = ज़मीन में गाड़ देना]
आइने को न जाने गुमा क्या हुआ
के वो मेरा दहन देख सकता नहीं
[गुमा = अहंकार]
मैंने पड़ने न दी अपने सर पे शिकन
अब कफ़न पे शिकन देख सकता नहीं
वाइज़ों ने सुनाई थी जो दास्ताँ
मैं वो 'ज़ाहिर' अदन देख सकता नहीं
[वाइज़ = उपदेश देने वाला, रश्क-ए-अदन = beautifully perfect]
मैं दराज़ों का शायर नहीं हूँ मुड़े
काग़ज़ों पे सुख़न देख सकता नहीं
[सुख़न = कविता]
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...