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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Tuesday, January 7, 2025

चाहो

धुँदली यादों की चाहत में क्यों अपने सपने खोता है
जो होता है गर चाहो तो जो चाहोगे वो होता है

सब कुछ मिल पाना मुश्किल है कुछ ना कुछ तो कम होता है 

जितना ज़्यादा मिल जाता है उतना पाने को रोता है 


सब जाने है इस दुनिया में जो होता है क्यों होता है
काँटे अक्सर इन्साँ खुद ही 'ज़ाहिर' है ख़ुद ही बोता है

कहते हैं के इस दुनिया में जो सोता है वो खोता है 

मुझको तो ऐसा लगता है जो खोता है वो सोता है 

Monday, December 2, 2024

बस ख़्वाब है

बस ख़्वाब है बस ख़्वाब है 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 
सोए हुए हम तुम सभी 
झूठे सभी जज़्बात हैं 

इस नींद में थकना भी है 
रोना भी है हँसना भी है 
इस नींद में जगना भी है 
फिर नींद में सोना भी है 

ख़्वाबों के भी कुछ ख़्वाब हैं 
झूठे सभी जज़्बात हैं 
सोए हुए हम तुम सभी 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

ये ख़्वाब भी है कमाल का 
है मलाल खुद ही सवाल का 
है हयात का तेज़ाब का 
है नशा ये जैसे शराब का 

ख़्वाबों की ये इक किताब है 
झूठे सभी जज़्बात हैं 
सोए हुए हम तुम सभी 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

बस ख़्वाब है बस ख़्वाब है 
ये ज़िन्दगी बस ख़्वाब है 

Friday, September 13, 2024

बे-असर

Behr (2122 1212 112)
After

ज़र्फ़-ए-हस्ती तो साज़ गर ही रही
शख़्सियत मेरी बे नज़र ही रही
पोश सारे नक़ाब चेहरों पे
मेरी हर बात बे-असर ही रही

हम मुक़म्मल नहीं हैं कहते रहो 
ज़द नहीं है तो ज़िद पे बैठे रहो 
क्या नतीजे हैं गुफ्तगू से मिले 
तेरी बातें अगर मगर ही रही 

ज़िन्दगी झील हम किनारे रहे 
जाने कितनों के हम सहारे रहे 
बात इतनी सी पालने के लिए 
हम इधर थे तो वो उधर ही रही 

कल वफ़ाओं की रात चलती रही 
जाने उनकी कमी क्युं खलती रही 
आँख दुनिया की जब सितारे हुईं 
अपनी पूछो तो आँख तर ही रही 

ये जो फितरत की बात करते रहे 
अपनी आदत से रोज़ मरते रहे 
जिस्म इन्सां का बस मिला था इन्हें 
रूह फिर भी तो जानवर ही रही 

हमको महफिल में वो बुलाते रहे
सर भी अपना यूं ही हिलाते रहे
बात सबने मेरी सुनी तो मगर 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

=====================

Before 

ज़र्फ़-ए-हस्ती साज़ गर ही रही 
शख़्सियत मेरी बे नज़र ही रही 
नक़ाब पोश सारे चेहरों में 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

हम मुक़म्मल नहीं हैं कहते हो 
ज़द नहीं है तो ज़िद पे बैठे हो 
क्या नतीजे निकलते बातों के 
बात अपनी अगर मगर ही रही 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

ज़िन्दगी झील हम किनारे हैं 
एक दूजे के हम सहारे हैं 
बात इतनी संभालने के लिए 
मैं इधर था तो वो उधर ही रही 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

जब वफ़ाओं की बात चलती है 
जाने किसकी कमी सी खलती है 
रात नज़रें सभी सितारे हुए 
मेरी पूछो तो आँख तर ही रही 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 


फितरतों की ये बात करते हैं 
अपनी आदत से रोज़ मरते हैं 
जिस्म इन्सां का बस मिला इनको 
रूह फिर भी तो जानवर ही रही 
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

महफिलों में मुझे बुलाते रहे
सर भी अपना यूं ही हिलाते रहे
बात सबने मेरी सुनी लेकिन
मेरी हर बात बे-असर ही रही 

मेरी हर बात बे-असर ही रही 

Sunday, August 4, 2024

आते जाते

मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

हरदम ही गुनगुनाना हरदम ही मुसकुराना 
तुम कैसे ढूंढते हो हंसने का कोई बहाना 
अच्छा,
अब तो बताओ के तुम कैसे फ़रमाते
अगर मैं रूठ जाती मुझको कैसे मनाते 

कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 
मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2

पैग़ाम देखा तेरा तो फिर याद आ गया रे 
मैं कुछ,
भूल गया गलती से और पकड़ा गया रे 
फिर सोचा अब तो तुझको मनाना पड़ेगा 
और ये गीत बन गया देखो मनाते मनाते 

मुझसे,
बोहोत लोग मिलते हैं यूँ ही आते जाते 
एक तुम ही मिले मुझसे हँसते हँसाते - 2
कैसे,
मदहोश आँखों से हम खुद को बचाते 
मेरे, 
दोस्त मुझसे कहते हैं जलते जलाते - 2 

हमनशीं

ये रातें, दिल की बातें घुल गई हैं ज़िंदगी में
बड़े काम आएगी ये हसीं बातें आशिक़ी में

ये रातें, दिल की बातें ...

मंज़र तो आईना है धड़कते से दो दिलों का 
ये दिल सुन रहा है एहतराम मंजिलों का
उलझनों में मत उलझना बोहोत कम ज़िंदगी है 
अपना प्यार बंदगी है बेशुमार ज़िंदगी है 

ये रातें, दिल की बातें ...

जब अंधेरा आए तो तुम मेरे साथ साथ रहना 
हम साथी हर जनम के इस जनम भी साथ है ना 
ता उम्र रहना चाहे दिल ऐसी बेखुदी में 
मैं तेरी हमसफ़र हूँ तू मेरा हमनशीं है 

ये रातें, दिल की बातें घुल गई हैं ज़िंदगी में
बड़े काम आएगी ये हसीं बातें आशिक़ी में

ये रातें, दिल की बातें ...
ये रातें, दिल की बातें ...

Duet Song: Female, Male, Both

Monday, July 22, 2024

बेदम

हम तो हुए नहीं थे तुमसे ख़फ़ा कभी 
किस बात का लगा है मजमा यहाँ अभी 
हम आज भी वही हैं ख़ामोश दिल की सुन 
आवाज़ आ रही है दिल से दबी दबी 

पेहचान तुझसे कोई माना कभी न थी 
लगते हो फिर भी मेरे मेहरम कभी कभी 
खुशबू को तो नवाज़िश तुमसे न मिल सकी
आएगी पास तेरे फिर भी कभी कभी 

हर साँस में बिठाकर जीते हैं तुझको हम 
रखते हो तुम भी हमको बेदम कभी कभी 
नज़रें नहीं मिलाकर बेचैन करते हो 
नज़रें मिला के कर दो बे ग़म कभी कभी 

Monday, July 15, 2024

कुछ कहो (नज़्म)

कुछ कहो, ..  कुछ तो कहो 
यूँ ही वीरान से जज़्बों के ख़ाब में ना रहो 
ख़ाब का क्या है आज है फिर ना होगा कभी 
भूल जाना है एक दिन ख़ाबों को सभी 

ग़ुबार होंगे एक दिन इनको ना सहो 
कुछ कहो, ..  कुछ तो कहो 

हाँ कहना नहीं है तो क्या तेरी आँखें चुप हैं 
जगह कम है, और छुपाने को कितना कुछ है 
संभल रही हैं मचलती हुई बातें तेरे दिल में 
मुझे पता है के तुम हो अभी कितनी मुश्किल में 

ना सुनो खुद की, 
और खुद से ही कहो 
कुछ कहो, ..  कुछ तो कहो 

तेरा पैगाम देखा जिसमे कुछ भी ना था 
जैसे सोचा मुझे तूने और भुला भी दिया 
मुझे पूछना है तुझसे गर इजाजत करो 
बात करनी है तुझसे अगर हाँ तुम कहो 

कुछ कहो, ..  कुछ तो कहो 
यूँ ही वीरान से जज़्बों के ख़ाब में ना रहो 
ख़ाब का क्या है आज है फिर ना होगा कभी 
भूल जाना है एक दिन ख़ाबों को सभी 
कुछ कहो, ..  कुछ तो कहो 

Friday, June 28, 2024

फिर वो बात हो

Bahr: 
  • 212
  • 12
  • 212
  • 12

  • फिर वो दौर हो फिर वो बात हो 
    हमसफ़र वही फिर वो साथ हो 

    याद सब नहीं कुछ तो याद है 
    बात में तेरी कुछ तो बात है 
    बात कुछ मगर जो ना हो सकी 
    बात फिर वही तेरे साथ हो || फिर वो दौर हो

    और ही कहीं आओ हम चलें 
    वक़्त के परे हम जहां मिलें 
    यूँ उसी जघा तुझसे बात हो 
    हाथ में मेरे तेरा हाथ हो || फिर वो दौर हो

    आओ छोड़ दें अपनी तल्खियाँ 
    आओ हम करें दूर दूरियां 
    गुफ़्तगू में भी एहतियात हो 
    हम शकल सा ही दिल में प्यार हों  || फिर वो दौर हो


    ==================================



    फिर वो दौर हो फिर वो बात हो 
    हमसफ़र वही फिर वो साथ हो 

    याद सब नहीं कुछ तो याद है 
    बात में तेरी कुछ तो बात है 
    बात कुछ मगर जो ना हो सकी 
    बात फिर वही तेरे साथ हो || फिर वो दौर हो

    और ही कहीं आओ हम चलें 
    वक़्त के परे हम जहां मिलें 
    यूँ किसी जघा मुलाक़ात हो 
    हाथ में मेरे तेरा हाथ हो || फिर वो दौर हो

    आओ छोड़ दें अपनी तल्खियाँ 
    आओ फिर करें नज़दीकियाँ 
    गुफ़्तगू में भी एहतियात हो 
    दिल मे एक से जज़्बात हों || फिर वो दौर हो

    आखिरत मेरी काश यूँ रहे 
    दर्द हर तरह बे असर रहे 
    इश्क था तुझे इकरार हो 
    मौत तब मिले फिर हयात हो || फिर वो दौर हो

    -- partnered creation by दीपाली & विवेक पोहरे 

    Saturday, June 22, 2024

    गुलशन

    भीनी सी सौंधी हवा है 
    मन को जो महका रही है 
    बोझिल सी साँसों को मेरी 
    हौले से बहला रही है 

    सूरज की किरणों को छूकर 
    खिल जाए बाग़ों की कलियाँ 
    जज़्बों को मेरे जगाकर 
    महके इरादों की गलियाँ
    दिलकश हवाएं भी इजहार से 
    गुलशन को लहका रही हैं ||  भीनी सी सौंधी हवा है  

    क़ुदरत बनाती है नमे 
    पंछी उसे गुनगुनाते 
    मदहोश करता है आलम 
    धुन ये सुनाते सुनाते 
    बादल की लड़ियाँ आकाश के
    नज़ारों में इठला रही हैं

    भीनी सी सौंधी हवा है 
    मन को जो महका रही है 
    बोझिल सी साँसों को मेरी 
    हौले से बहला रही है 

    -- partnered creation by दीपाली & विवेक पोहरे 

    Friday, June 21, 2024

    आब

    आसमानों से आता है हर हुनर ​​का ये बानी है (बनाने वाला - architect)

    ये सच्ची बात है देखो हर किसी ने ये मानी है

    ये अपनी चाल से काटे ज़माने भर की उलझन को

    ज़ेहन में याद रख जाए बड़ा ये दास्तानी है


    किसी पैग़ाम से मिल कर ये हमदम की निशानी है

    इसे जो पढ़ सके कोई तो फिर ये रा'ए ज़ानी है (टिप्पणी - commentary )

    कोई भी छोड़ ना पाया अभी तक इस अकेले को

    बहुत नायाब है देखो बड़ा ये पास्तानी है (प्राचीन - antique)


    जहां पर ये नहीं होता वहां आनी ना जानी है

    जहां भी ये बिखर जाए वहां बस शादमानी है (खुशी - joy)

    ये हरदम राज करता है महफ़िलों की ये रानी है

    बिना इसके बड़ी सूखी बदगुमा मेज़बानी है


    इसे दे दो ज़रा इज़्ज़त कोई इसका ना सानी है

    ज़िन्दगी जब से चलती है बात इतनी पुरानी है

    ये पानी है ये पानी है बड़ा ही खान दानी है

    बुढ़ापे में दवा सा है जवानों की जवानी है


    हयात-ए-आब पानी है ज़हर की राख पानी है 

    ज़िंदगी के लिए पानी मौत के बाद पानी है 

    ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है 

    ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है 

    दिखावा

    ये दुनिया है दिखावा 
    है दिखावा है दिखावा है

    दिखावा है ये दुनिया है 
    ये दुनिया बस दिखावा है

    दिखावा ही दिखाना है
    ज़बर्दस्ती बताना है
    नुमाइश है सर-ए-बाज़ार
    खुद को बेच खाना है ।। दिखावा है ये ...

    असल में जो किया ना हो
    उसे कहके जताना है
    किसी को चोट पोहचा कर
    इनायत कर गिनाना है ।। दिखावा है ये ...

    फ़रामोशी है ख़ामोशी
    है एहसानों की तकदीरें
    मदद लेकर किसी की भी 
    सदा को भूल जाना है ।। दिखावा है ये ...

    ना ढब कोई रहा हम दर्द
    का ना दुश्मनी का ढब
    जिन्हे कोसा किया था कल
    हाथ उनसे मिलाना है ।। दिखावा है ये ...

    रवैया भी दिखावा है
    ये पहनवा दिखावा है
    यहां काफिर का काफिर गाह
    में रहना दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    ये जज़्बाती हुए जाते हैं
    सबके सामने देखो
    जो आँखों से गिरे जाते हैं 
    आँसू भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    मोहब्बत भी दिखावा है
    अदावट भी दिखावा है
    जुबां की बात को कर के 
    दिखाना भी दिखावा है ।। दिखावा है ये ...

    ये दुनिया है दिखावा 
    है दिखावा है दिखावा है

    दिखावा है ये दुनिया है 
    ये दुनिया बस दिखावा है

    Monday, June 17, 2024

    मन कंगन

    मतवारा मोरा मन 
    चंचल जैसे कंगन
    मतवारा मोरा मन 

    मन चाहत जो भी नाहि मिले 
    मिल जाये कदर वा की ना करे 
    अभिमानी प्रपंची हठ ये धरे 
    और बाजे छन छन छन 

    मतवारा मोरा मन 
    चंचल जैसे कंगन
    मतवारा मोरा मन 

    जब ध्यान करे और ज्ञान धरे 
    तब एक अग्र चित हाथ धरे 
    मन बाहर से आघात करे 
    और डोले यह आसन 

    मतवारा मोरा मन 
    चंचल जैसे कंगन
    मतवारा मोरा मन 

    यह चंचल और चपल मन है 
    चिंतन इसको प्रति पल पल है 
    आकाश में घिर घिर आये 
    जैसे कारे बादल 

    मतवारा मोरा मन 
    चंचल जैसे कंगन
    मतवारा मोरा मन 

    Monday, June 10, 2024

    बात नाज़ुक है

    बात नाज़ुक है ज़रा हौले से 
    फिर कभी हम तुझे बता देंगे 
    आज रहने दो बात इतनी ही 
    दाग़ हम फिर कभी दिखा देंगे 

    रास्ते फूल के बना डाले 
    ये तो मुमकिन नहीं किसी के लिए 
    कोई पत्थर मगर जो बन आए 
    रास्तों से उसे हटा देंगे 

    खोज लोगों को खुदा की है यहाँ 
    क्यूँ भटकते हैं मुझे इल्म नहीं 
    कोई पूछे अगर खुदा का पता 
    तो तेरा घर उसे दिखा देंगे 

    उनको इस बात का बड़ा ग़म है 
    के जाताना हमें नहीं आता 
    वक़्त आएगा एक दिन उनको 
    प्यार कर के ही हम बता देंगे

    Tuesday, June 4, 2024

    बस इक दफ़ा

    बस इक दफ़ा तुझे मिलने की मोहलत ही चाहिए 
    फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
    बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

    आँख भर देख के भर जाए दिल तो क्या ही बात हो 
    तेरे होंटों के लरज़िशों सी बेबसी भी चाहिए 
    फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
    बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

    फूल इठलाना सीख जाएँ तेरी चाल देख कर 
    तेरे सबक़ के साथ इनको नसीहत भी चाहिए 
    फिर इन्हें कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
    बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

    बात तस्वीर से बन जाती तो इतना बुरा न था 
    मेरी दुनिया को तेरे दिल की मुहब्बत भी चाहिए 
    फिर मुझे कुछ भी, नहीं कुछ भी ज़िंदगी से चाहिए 
    बस इक दफ़ा, इक दफ़ा, बस इक दफ़ा

    Sunday, June 2, 2024

    मन ख़ानाबदोश है

    मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है 
    मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन 

    कहाँ से चला था कहाँ ये रुकेगा 
    ये जीतेगा किससे कहाँ ये झुकेगा 
    ये किसको है पता और किसे है खबर

    मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन 

    नज़र में है दुनिया नज़र में ज़माना 
    जहाँ दिल न चाहे वहाँ फिर न जाना 
    है मर्ज़ी का मालिक जवाँ सरफ़रोश है 

    मन ख़ानाबदोश है; ख़ानाबदोश है मन 

    न है इसको थकना न है इसको रुकना 
    तमन्ना तो है इसकी जहाँ को है तकना 
    क़िस्मत में है सफर और डगर पे नज़र 

    मन ख़ानाबदोश है मन ख़ानाबदोश है 
    मन ख़ानाबदोश है ख़ानाबदोश है मन

    Friday, May 31, 2024

    दिल चाहता है

    आईने में चेहरा है 
    चेहरे पे आँखें हैं 
    आँखों ने देखा 
    जिसे दिल चाहता है 

    दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

    दिल में जो धड़कन है 
    धड़कन में चाहत है 
    चाहत वही है 
    जिसे दिल चाहता है 

    दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

    दुनिया डराती है 
    धड़कन बताती है 
    वो ही सही है 
    जो भी दिल चाहता है 

    दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

    आँखों में नींदें हैं 
    नींदों में सपने हैं 
    सपनों में वो हैं 
    जिसे दिल चाहता है  

    दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

    दौलत लुभाती है 
    शोहरत बुलाती है
    रहना वहीं है 
    जहाँ दिल चाहता है 

    दिल चाहता है जिसे दिल चाहता है - २ 

    Monday, May 27, 2024

    कुछ बातें

    कुछ बातें 
    तो रह जाती हैं बातों में 
    जो खुद से ही
    कभी कहते हैं रातों में 

    धुंधली सी
    आँखों की बरसातों में 
    कुछ बातें 
    झूमती हैं हवाओं में 

    रह जाती हैं कुछ बातें 
    कह जाती हैं कुछ रातें 
    और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते 

    दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें 

    कुछ बातें
    याद आती सन्नाटों में 
    मुझे पागल 
    बना जाती जज़्बातों से

    बड़ी उलझन 
    शिकस्तों से और मातों से
    हैं कुछ बातें
    अटक जाती हैं नातों मे 
     
    हारना तो नहीं मुझे 
    जीतना भी नहीं मुझे 
    तो कैसे मैं कहूँ तुझे 

    कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे 

    तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें

    Saturday, May 18, 2024

    स्वीकार

    जीवन कुछ दिन का है 
    कुछ दिन जीवन के हैं 
    हम तुम इस जीवन में 
    बस कुछ दिन रहते हैं 

    कुछ लोग ये कहते हैं 
    वो सब कुछ सहते हैं 
    कुछ हैं जो सेह कर भी 
    कुछ नहीं कहते हैं 

    ऐसे कुछ लोग भी हैं 
    हरदम खुश रहते हैं 
    अक्सर औरों से वो 
    दिल खोल के मिलते हैं 

    इस वक़्त के ताने में 
    जीवन के बाने में 
    वो ही खुश रहते हैं जो
    मिल जुल कर रहते हैं 

    Thursday, May 16, 2024

    दुनिया

    तेरे लफ़्ज़ों में मेरी बात छुपी रहती है 
    मैं ही कहता हूँ समझ जब भी तू कुछ कहती है  
    मैं कहाँ रहता हूँ मुझको तो कुछ खबर ही नहीं 
    तू सदा से ही मगर मेरे दिल मे रहती है 

    तुझे जाना है तो जा किसने तुझको रोका है 
    तेरा जाना मेरी आँखों के लिए धोखा है 
    मैं हूँ सागर तेरा उलफ़त मे इंतज़ार करूं 
    तू किसी दरिया सी बस मेरे तरफ बहती है

    तू सदा से ही मगर

    मुड़ के ना देख देख मुड़ के जिसने देखा है 
    वो कभी बढ़ ना सके किसने उनको देखा है 
    हर घड़ी कोसने की आदतें हैं दुनिया की 
    छोड़ दुनिया की बात दुनिया कुछ भी कहती है 

    तू सदा से ही मगर

    Tuesday, May 14, 2024

    आदतें

    आदतें 
    नहीं बदलती कभी 
    लोग ढल जाते हैं 
    पर बदलना गवारा नहीं 

    आदतें 
    ज़रा सा रुक जाती हैं 
    फिर पकड़ ही लेती हैं 
    छोड़ कर कभी जाती नहीं 

    आदतें 
    नई ये होती नहीं 
    दिल मे कसक की तरह 
    ये नजर कभी आती नहीं 

    आदतें 
    छूटेगी कैसे भला 
    पूछता हूँ मैं इसे 
    कुछ भी बतलाती नहीं 

    ख़ामोशी

    ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...