जितना ज़्यादा मिल जाता है उतना पाने को रोता है
कहते हैं के इस दुनिया में जो सोता है वो खोता है
मुझको तो ऐसा लगता है जो खोता है वो सोता है
जितना ज़्यादा मिल जाता है उतना पाने को रोता है
कहते हैं के इस दुनिया में जो सोता है वो खोता है
मुझको तो ऐसा लगता है जो खोता है वो सोता है
आसमानों से आता है हर हुनर का ये बानी है (बनाने वाला - architect)
ये सच्ची बात है देखो हर किसी ने ये मानी है
ये अपनी चाल से काटे ज़माने भर की उलझन को
ज़ेहन में याद रख जाए बड़ा ये दास्तानी है
किसी पैग़ाम से मिल कर ये हमदम की निशानी है
इसे जो पढ़ सके कोई तो फिर ये रा'ए ज़ानी है (टिप्पणी - commentary )
कोई भी छोड़ ना पाया अभी तक इस अकेले को
बहुत नायाब है देखो बड़ा ये पास्तानी है (प्राचीन - antique)
जहां पर ये नहीं होता वहां आनी ना जानी है
जहां भी ये बिखर जाए वहां बस शादमानी है (खुशी - joy)
ये हरदम राज करता है महफ़िलों की ये रानी है
बिना इसके बड़ी सूखी बदगुमा मेज़बानी है
इसे दे दो ज़रा इज़्ज़त कोई इसका ना सानी है
ज़िन्दगी जब से चलती है बात इतनी पुरानी है
ये पानी है ये पानी है बड़ा ही खान दानी है
बुढ़ापे में दवा सा है जवानों की जवानी है
हयात-ए-आब पानी है ज़हर की राख पानी है
ज़िंदगी के लिए पानी मौत के बाद पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
ज़मी से है फ़लक तक ज़िंदगी तो बस ये पानी है
कुछ बातें
तो रह जाती हैं बातों में
जो खुद से ही
कभी कहते हैं रातों में
धुंधली सी
आँखों की बरसातों में
कुछ बातें
झूमती हैं हवाओं में
रह जाती हैं कुछ बातें
कह जाती हैं कुछ रातें
और हम तो बस तुझको ही हैं दोहराते
दोहराते ...... दोहराती हैं कुछ बातें
कुछ बातें
याद आती सन्नाटों में
मुझे पागल
बना जाती जज़्बातों से
बड़ी उलझन
शिकस्तों से और मातों से
हैं कुछ बातें
अटक जाती हैं नातों मे
हारना तो नहीं मुझे
जीतना भी नहीं मुझे
तो कैसे मैं कहूँ तुझे
कि आ जा रे ...... तू आ जा रे, सुना जा रे
तेरी ऐसी ... ही ... कुछ बातें ... कुछ बातें
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...