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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Monday, December 9, 2024

कोशिश

Bahr: 221 1221 1221 122

करते तो हैं कोशिश ये मुक़द्दम नहीं होता
हम दम तो भरें पर कोई हमदम नहीं होता
चादर खुशी की तान के सोते हैं कभी तो
दुनिया को यही ग़म के हमे ग़म नहीं होता
[मुक़द्दम = Important]

आगाज़ किया करते हो किस्मत के सहारे
अंजाम कभी तेरा मुसल्लम नहीं होता
[आगाज़ = Start, मुसल्लम = accepted]

ये किस तरह से बांधते हो पाँव में घुँघरू
के नाचते हो फिर भी ये छम छम नहीं होता

मौसम की तलाशी में भटकते हो मुसलसल
कैसे कहें के प्यार का मौसम नहीं होता
[मुसलसल = Continuously]

तब तक नहीं होता कोई नादान से दाना
जब तक वो ज़माने में मैं से हम नहीं होता
[दाना= Mature]

देखे हैं कई लोग हैं ऐसे वो बेचारे
जल जाती है रस्सी पर अहम् कम नहीं होता
[अहम् = Ego]

'ज़ाहिर' की ये बातें तो महज़ कोशिशें ही हैं
जितना भी लिखें मस्त दमादम नहीं होता 
[दमादम = Consistently]

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...