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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
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Sunday, September 1, 2024

एकाकार

छन भंगुर या मन सन एकाकार
ना हुइहें एकाकार 

या सरीर के सबरे अवयव
सब कुं सब बेकार 
ना हुइहें एकाकार 

भय सू थर थर काँप रहौ सब 
मरणौ है सबकु अब की तब 
या मन कैसौ ई सरीर से 
करीहें बेड़ा पार 

ना हुइहें एकाकार

मैं आपन भरम जाल बनावे 
सत सुर बा केहु ना सुनावै 
सत जेहि समझे मन तेही मैं के 
पूरन हो संस्कार 

ना होइहें एकाकार 
छन भंगुर या मन सन एकाकार
ना हुइहें एकाकार 

या सरीर के सबरे अवयव
सब कुं सब बेकार 
ना हुइहें एकाकार 
ना हुइहें एकाकार 

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...