About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Wednesday, February 12, 2025
दिन आ रहे हैं
Friday, February 7, 2025
तेरा ख़याल
Wednesday, January 8, 2025
आबशार
ग़म ए दिल में हूँ हवाओं के बे-क़रार में हूँ
या कहो जान ए तमन्ना मैं तेरे प्यार में हूँ
ये तिरा साथ जो मिल जाए तो शिफ़ा ही मिले
यूँ मचलकर के मैं उड़ने के इंतज़ार में हूँ
[शिफ़ा = रोग से मुक्ति]
है किसे फ़िक्र ज़माने की बात कौन सुने
तिरे होठों से ये कह दो मैं एतबार में हूँ
[एतबार = trust]
ये भवें तेरी नज़र तेरी तेरी चाल बला
है ख़ुदा पहले मगर मैं भी हुस्न कार में हूँ
[हुस्न कार = creator of the beauty]
ये तो 'ज़ाहिर' है के ज़िंदा हूँ आस पे ही तेरी
आजकल शामों सहर तेरे रोज़गार में हूँ
मैं तो तेरे ही पिघलते से इंतज़ार में हूँ
ले मुझे जीत मुसलसल मैं अपनी हार में हूँ
है मुझे तिश्नगी क्या जाने किस जनम की जज़ा
के जनम ले के तिरे बार-ओ-आबशार में हूँ
[तिश्नगी = तपन, जज़ा = बदला, बार = rain, आबशार = झरना]
Saturday, December 14, 2024
क़ातिल
Tuesday, December 10, 2024
इंतज़ार
Thursday, December 5, 2024
हद करते हो
Friday, August 30, 2024
ज़रा मुश्किल
Monday, July 22, 2024
बेदम
Wednesday, July 17, 2024
बिजली
Saturday, July 13, 2024
ख़ुश्बू (नज़्म)
Monday, June 10, 2024
बात नाज़ुक है
Tuesday, June 4, 2024
बस इक दफ़ा
Wednesday, May 29, 2024
अब चलो जाओ
Friday, April 26, 2024
ज़माने
रूठना तेरा
Sunday, April 14, 2024
तुम क्या कर रही हो अभी
Tuesday, April 9, 2024
सदा
Friday, March 22, 2024
लाचारी
Tuesday, March 12, 2024
रुहदारी
Monday, March 11, 2024
शायर के ख़्वाब
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...