About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Tuesday, February 11, 2025
कोई पागल समझता है
Saturday, February 1, 2025
इज़्ज़त
इस दुनिया में सबको अपनी कुछ बात सुनानी होती है
रस्ते की कहानी है तो कहीं मंज़िल की निशानी होती है
बाज़ारी हो चेहरे की चमक या हो हाथों में फ़ोन नया
आपा धापी की दुनिया में औक़ात दिखानी होती है
है क़र्ज़ सभी के माथे पर तो फ़र्ज़ कोई क्या पालेगा
अपने काँधे पर ख़ुद अपनी ही लाश उठानी होती है
शहरों की गर्दी में अपने अंदर क्या खून बचाओगे
जीवन की गाड़ी भी अब तो पानी से चलानी होती है
[गर्दी = revolution/क्रांति]
दुनिया वाले इक दूजे की दुनिया तो उजाड़े देते हैं
और फिर अपनी उजड़ी दुनिया ख़ुद को ही बसानी होती है
ये उम्र तमाशा है इसमें बचपन से है बूढ़ा होना
देखे दुनिया जिस मंज़र को अक्सर वो जवानी होती है
ये प्यार भी क्या है बला भला कैसी यादें दे जाता है
दिल पर जो दाग़ रहे वो ही दिलबर की निशानी होती है
होता ही नहीं है शहरों में तो वक़्त कहाँ से लाओगे
ख़ुद से ही 'ज़ाहिर' ख़ुद को ही आवाज़ लगानी होती है
इज़्ज़त की बातें रहने दो अब नहीं ज़माना इज़्ज़त का
बोहतों को कार गुज़ारिश में इज़्ज़त ही गवानी होती है
[कार गुज़ारिश = request for work]
Thursday, January 9, 2025
तोता
Tuesday, December 3, 2024
पुराना
Saturday, November 30, 2024
बात इतनी सी है
Sunday, November 17, 2024
खुदकुशी
Friday, November 15, 2024
बदलते बदलते
Wednesday, October 23, 2024
इजाज़त
Wednesday, October 16, 2024
साहब
Wednesday, October 9, 2024
माँ
Monday, October 7, 2024
झूठा नहीं है
Wednesday, September 25, 2024
काफ़िर
Wednesday, September 18, 2024
फ़रेबी
Saturday, September 14, 2024
अख़बार
Friday, September 13, 2024
पत्थर
बे-असर
Thursday, September 12, 2024
राग़िब
Monday, September 9, 2024
अक्सर
- Behr 2122 2122 2122
Thursday, September 5, 2024
तनहाई
Wednesday, September 4, 2024
तो क्या
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...