About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Friday, November 15, 2024
बदलते बदलते
Thursday, November 7, 2024
ताल
Wednesday, May 29, 2024
अब चलो जाओ
Tuesday, May 21, 2024
मुराद
वो कहते रहते हैं अक्सर कभी तो याद करो
और हम कहें के भूलने की तुम फ़र्याद करो
राग़ों मे दौड़ते फिरते हैं वो लहू की तरह
ऐ खुदा अब मेरे जसबे को तुम मुराद करो
Saturday, April 6, 2024
मार डाला
Monday, March 25, 2024
नहीं समझोगे
अब तो रहने दो मेरी बात तुम नहीं समझोगे
मेरी बे-ढंग सोच है तुम नहीं समझोगे
मैं बोलता ही जाऊँगा दीवानों की तरह
जो सोच रखा है तुमने तुम वही समझोगे
तुम नहीं समझोगे के क्यूँ तुम नहीं समझोगे
ये बात सोचने की है ये नहीं समझोगे
जो मैं कह दूँ के रहने दो मेरी बातों को
तो मैं खुद में ही हूँ मग़रूर यही समझोगे
ये समझ दिल की है दिमाग़ से ना समझोगे
है सोच के परे की बात नहीं समझोगे
जो आँख मूँद लो दिमाग़ को खाली कर दो
तब जो समझोगे तो समझो के सही समझोगे
Saturday, March 23, 2024
मंज़िलें
Wednesday, March 6, 2024
आवारगी
Monday, March 4, 2024
गुमाँ
आजकल
मिलता हूँ इक अजीब शक्सियत से आजकल
होता हूँ रू-ब-रू मैं हक़ीक़त से आजकल
कहता तो कुछ नहीं है मुझे देखता है वो
शायद मेरी हरकत से है उदास आजकल
है कौन आईने में मुझसे चाहता है क्या
चलता नहीं कुछ मेरी इजाज़त से आजकल
जब देखता हूँ उसको तो नज़रें वो झुका ले
लगता है के शर्मिंदा बोहोत है वो आजकल
उसने ये सिखाया के सफर बे-हिसाब है
मिलता है सुकूँ आज में रहने से आजकल
Friday, March 1, 2024
नहीं मिला

Saturday, February 17, 2024
क़ता - लापता

सितारों से पूछा था इक दिन किसी ने
के क्यूँ आसमानों में यूँ तैरते हो
सितारों ने पूछा उसे ही पलट कर
ज़मीं पे हो फिर भी ये क्या घूरते हो?
किसी से भी पूछो तमन्नाएँ दिल की (तमन्ना = desire)
किसी से भी पूछो के क्या चाहते हो
किसी को नहीं है पता ख़ुद की ख़्वाहिश (ख़्वाहिश = will)
बताएँगे वो जो सभी चाहते हों
ये जन्नत की हूरें ये दोज़ख़ की बातें (दोज़ख़ = hell)
किन्हें क्या मिला है किसे ये पता है
जो दो प्यार के बोल कहता हो तुमसे
उसे ही इलम है वही जानता है (इल्म = knowledge)
है तस्वीर तेरी मेरे आईने में
ये क्या गुफ़्तगू है ये क्या माजरा है (गुफ़्तगू = conversation)
ये पूछूँ मैं तुमसे जो दे दो इजाज़त
के ऐसा मेरा तुझसे क्या राब्ता है
भटकते हैं हम-तुम यूँ ही इस जहाँ में
न तेरी ख़ता है न मेरी ख़ता है (ख़ता = fault)
हमें हिक़मतों का सबक़ देने वाले (हिक़मत = ज्ञान, wisdom)
न जाने किधर हैं कहाँ लापता हैं
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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दिल की ये धड़कन इबादत सी है और तेरी मुरादें इनायत सी है ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम पर दिल को धड़कने की आदत सी है बातें करूँ दिन की रा...
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Bahr: 2122 1212 22 इश्क़ की हद को पार कर बैठा दिल ये दुश्मन से प्यार कर बैठा उसका आना हुआ जो बज़्म ए मज़ार आँख दो से मैं चार कर बैठा दिल स...