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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, February 7, 2024

कहानी

इक कहानी थी 
इक फ़साना था 
कुछ हक़ीक़त थी 
कुछ निभाना था 

हाथों से खत लिखते थे तब 
वो भी क्या ज़माना था 
दूर कहीं यादों की गली में 
कोई तेरा दीवाना था 

नदी किनारे बैठ के तुमको 
नग़मा ये सुनाना था 
धड़कन ये थमती ही नहीं है 
आँखों से ये बताना था 

एक छतरी थी वो भी टूटी 
उसका तो बस बहाना था 
मुझको सावन की बारिश में 
तेरे संग नहाना था 

प्यार का वादा करते थे तुम 
देर से मिलने आना था 
देर से आकर जल्दी जाना 
ऐसे मुझको सताना था 

इक कहानी थी 
इक फ़साना था 
कुछ हक़ीक़त थी 
कुछ निभाना था 

Monday, February 5, 2024

उलझन

तेरी रुसवाई में बेखुद को मनाते देखा 
और दुनिया को परेशान-सताते देखा 

मैंने नाहक़ ही बेदार सी बातें कहकर 
खुद को उलझन ही उलझन में फ़ँसाते देखा 


ख़ुद-ब-ख़ुद, कुछ तो गिरा, हो-न-हो, तुम आओगे 
ये वहम है तो मगर, ख़ुद को बताते देखा ... खुद को उलझन ... 

अब निखर जाएंगे दिन, बात भी बन जायेगी 
क़ाफ़िरों में हूँ मगर, हाथ उठाके देखा ... खुद को उलझन ... 

नींद आ जाएगी ख़ाबों में वो ही आएंगे 
ख़ाब में ख़ुद को यूं ही रात बिताते देखा ... खुद को उलझन ...

तेरा सबब जो छिड़ा, चाँद मैं दिखाने लगा
मेरे यारों ने मुझे बात बनाते देखा ... खुद को उलझन ...  

ये राज़ है, के मरते हो, मुझपे बे-इंतेहा 
इस लतीफे से तुझे सबको हंसाते देखा ... खुद को उलझन ... 

तेरी रुसवाई में बेखुद को मनाते देखा 
और दुनिया को परेशान-सताते देखा 

Sunday, February 4, 2024

तिश्नगी

Bahr: 
  • 2122
  • 1212
  • 22

  • तेरी यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुनली सी हो गई मेरी 
    दिल ये डूबा है आसुओ में पर 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    तुम ही तुम सांस में समाये हो 
    फिर भी क्यों याद आ रही तेरी 
    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी

    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 
    अक्ल ये है के भूलना चाहे 
    दिल मगर है के कर रहा देरी 

    शेर दो चार इस तरह जोड़े 
    आँख माज़ी पे मैंने बस फेरी 
    शायरी है नहीं रग़ों में पर
    शायराना है ज़िन्दगी मेरी 






    ========================


    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी 
    दिल सराबों में आब ढूंढे है 
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 

    ये अक्ल है के भूलना चाहे 
    दिल की धड़कन में हो रही देरी
    आ गया फिर से प्यार का मौसम
    छिल गए घाव पक गई बेरी 

    तेरे रस्ते की ताक में शायद 
    आँख पत्थर की हो गई मेरी
    तुम ही तुम हो सांस में अब तो
    सांस लेकिन न आ रही मेरी 

    तेरे यादों की चादरें घेरी 
    आँख धुंधली सी हो गई मेरी
    दिल सराबों में आब ढूंढे है
    तिश्नगी मिट नहीं रही मेरी 


    Thursday, February 1, 2024

    वक़्त

    वक़्त है, कहीं बड़ा सख़्त है
    कहीं बड़ा प्यारा, बस तुम्हारा

    वक़्त है, कभी बहुत थोड़ा
    थोड़ा भी बहुत है, ओ दिलदारा

    वक्त है, ज़िन्दगी का ज़ेवर
    जिसने है ग़ुज़ारा, वो बेसहारा

    वक़्त है, सबके पास अपना
    पास अपने कुछ भी, ना रहने वाला

    वक़्त है, बहता हुआ पानी
    जिंदगी है जानी, मौत का इशारा

    वक़्त है, सांसों की रवानी
    हलचलों का घर है, यादों का पिटारा

    वक्त है, कैसा भी हो कम है
    ना मिला उसका ग़म है, ना मिलने वाला

    वक़्त है, जिसके पास ना हो
    वो बेअसर है, ना उसमें जान

    वक़्त है, असलियत में लेकिन
    ना कोई मंजिल, ना इम्तेहान 

    Wednesday, January 31, 2024

    खेल

    ये खेल है सितारों का कहानी का किताबों का सवालों का जवाबों का पेचीदा पड़े हिसाबों का

    ये खेल है रुबाबों का शख़्सीयति हिजाबों का अमीरों का नवाबों का ग़रीबों का गुनाहों का

    ये खेल है सराबों का

    सन्नाटों का आवाज़ों का शराबों का हयातों का रूहों का ख़राबों का

    ये खेल है ख़यालों का कहानी के किरदारों का तन्हाई की शामों का जानों का जहानों का

    ये खेल है तलाशों का अपनों का ख़ुदाओं का ग़ुज़ारिश का नियाज़ों का हैरत का हैरानों का

    ये खेल है आकाशों का रस्तों का मीनारों का कांटों का गुलाबों का मैं का मैखानों का

    ये खेल है ज़दाओं का हुस्नों का अदाओं का पर्दों का हयाओं का आग़ाज़-ओ-अंजामों का

    ये खेल है हवाओं का सांसों का दुआओं का बिखरे पड़े तमाशों का ख़ामोशी-अल्फ़ाज़ों का

    Saturday, January 27, 2024

    रफ़्तारें

    demo

    ये रफ़्तारें 

    न आँखों से न बातों से 
    न मदहोशी की रातों से 
    न खुशबू की अदाओं से 
    ज़हन के पार गाहों से
    याद करता है जब कामिल 
    बता देती हैं रफ़्तारें 

    ये रफ़्तारें, रग़ों में दौड़ जाती हैं रफ़्तारें 
    कभी हौले, कभी हौले से बढ़ जाती हैं रफ़्तारें 

    लहू में खेलती है झेलती है ज़िन्दगी को रेलती है 
    क्या न करवाती हैं रफ़्तारें 
    ये रफ़्तारें, धड़क जाती हैं रफ़्तारें 

    कभी ये प्यार की शक्लों में आती है 
    कभी डर से ये रंजों को जगाती है 
    कभी ज़िंदा कभी है मौत की आहट में रफ़्तारें 

    ये रफ़्तारें, कहीं ये खिलखिलाती हैं 
    ये रफ़्तारें, कहीं ताक़त दिखाती हैं 
    सिसकती हैं थका जाती हैं रफ़्तारें 

    बता देती हैं रफ़्तारें 
    याद करता है जब कामिल 
    ज़हन के पार गाहों से
    न खुशबू की अदाओं से 
    न मदहोशी की रातों से 
    न आँखों से न बातों से 

    ये रफ़्तारें

    Tuesday, January 23, 2024

    प्यार

    तेरी तस्वीर रख रख के नज़र से दूर करता हूँ 
    बेवजह किसी बहाने से खुद को मजबूर करता हूँ 

    मैं अक्सर वादा कर के ही दिल को मायूस करता हूँ
    तेरी आदत न रही फिर भी तुझे महसूस करता हूँ 

    याद बेशक तेरी मुझको दर्द बेइंतेहा देती 
    याद कर कर के ज़ख्मों को लहू नासूर करता हूँ 

    तेरी तक़दीर में शायद मैं नहीं और है कोई
    तेरी इस बात को अब मैं दिल से  मंज़ूर करता हूँ 

    तू मुझसे दूर है लेकिन तू मेरे दिल में बस्ती है 
    इसलिए जानेमन तुझको प्यार भरपूर करता हूँ 


    ख़ामोशी

    ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...