Bahr: 11212-11212-11212-11212
जो ज़हन गिरफ़्त मलाल थे
कभी आसुओं में वो बह गए
जो क़लम किये थे ख़याल हमने
किसी किताब में रह गए
[ज़हन गिरफ़्त = hidden in mind]
वो निशानियाँ वो इनायतें
तेरी याद से तो मिले मगर
वो जो पल गुज़ारे थे साथ में
वो उसी मक़ाम पे रह गए
[इनायतें = respects]
जो भी कहना था वो ना कह सके
यूँ के हम भी ऐसे अजीब थे
यूँ के तुम भी कैसे अजीब थे
जो ना कहना था वोही कह गए
इसे प्यार हम ना कहें तो फिर
ये बता ज़रा इसे क्या कहें
तेरी ताकिदों के लिहाज़ में
बिलिहाज बात भी सह गए
[ताकिदों = warnings]
तेरा साथ थी मेरी जुस्तजू
मगर इत्तफ़ाक़ की बात है
तेरी जुस्तजू में चले थे हम
तेरी जुस्तजू में ही रह गए
[जुस्तजू = aspirations]
जो ज़हन गिरफ़्त मलाल थे
कभी आसुओं में वो बह गए
जो क़लम किये थे ख़याल हमने
किसी क़िताब में रह गए

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