ना हुइहें एकाकार
या सरीर के सबरे अवयव
सब कुं सब बेकार
ना हुइहें एकाकार
भय सू थर थर काँप रहौ सब
मरणौ है सबकु अब की तब
या मन कैसौ ई सरीर से
करीहें बेड़ा पार
ना हुइहें एकाकार
मैं आपन भरम जाल बनावे
सत सुर बा केहु ना सुनावै
सत जेहि समझे मन तेही मैं के
पूरन हो संस्कार
ना होइहें एकाकार
छन भंगुर या मन सन एकाकार
ना हुइहें एकाकार
या सरीर के सबरे अवयव
सब कुं सब बेकार
ना हुइहें एकाकार
ना हुइहें एकाकार

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