About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Wednesday, March 21, 2007
लिक्खा है इक गीत नया
जीवन के ताने बाने में
सारा जीवन बीत गया
हर इक मोड़ पे हमने अक्सर
लिक्खा है इक गीत नया
धुंधले से लगते हैं शीशे
पर्तों पर धुंधली यादें
ख़ाबों को जब भी देखा है
याद आया जो बीत गया
हम तो हैं पिछ्डे हमसे ही बिछ्ड़े
हमको ही ताना देते हैं
यूं मिट्टी से अलग हुए के
भूल गये सब रीत हया
सच तो सच है झूठ भी सच है
किस सच की ये बात है दोस्त
हमने तो सच लिक्खा था पर
झूठा सच ही जीत गया
जीवन के ताने बाने में
सारा जीवन बीत गया
हर इक मोड़ पे हमने अक्सर
लिक्खा है इक गीत नया
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
-
सब है पराया रख ना क्या है ग़म हैं किसी के अ पना क्या है उम्र गुज़ारी खुल गई आँखें उम्र गुज़ारी अब जागा हूँ उम्र गुज़ारी त...
-
तेरी अदीम निगाहों ने बे पनाह किया बिना किये मुझे आगाह ही तबाह किया ये किस तरह कि है उल्फत के मेरी फ़िक्र नहीं न कैद ही किया मुझको न ही रियाह ...
-
जब कभी तेरा ख़याल आता है जाने क्या दिल को हुआ जाता है वक़्त ठहरा हुआ सा लगता है तू मेरे दिल में समा जाता है ग़ैर लगती है ये दुनिया मुझ को तू सग...
No comments:
Post a Comment