प्यार वों करते हैं हमसे मगर नहीं कहते
उनको डर है के हम मिलकर जुदा न हो जाएँ
हमने सोना तो कब का छोड़ दिया इस डर से
के वो खाबों में भी आकर जुदा न हो जाएँ
Pyar wo kartay hain hamsay magar nahin kehte
Unko dar hai ke ham milkar judaa na ho jaayen
Hamne sona to kab ka chhod dia is dar say
Ke wo khaabon me bhi aakar judaa na ho jaayen
About Me
- Vivek Pohre
- I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.
Saturday, April 9, 2011
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ख़ामोशी
ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...
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