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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Saturday, February 10, 2024

हमने न जाना तुमने न जाना

दिल धड़कन का क्या है फ़साना 
हमने न जाना तुमने न जाना 
सुनता हूँ ये रोग पुराना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

दिल पर बोझ पड़ा था कब से 
कितनी ख़ुशी पाई है सबसे 
बाँटा जब ये ग़म का ख़ज़ाना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

ख़ुश्बू सी आने लगती है 
जब दिलबर की बातें हों 
बिन बातों के भी शर्माना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

दिल की क़शिश कुछ लिखवाती है 
ग़ुमग़श्ती के आलम में 
लिख कर कुछ फिर से वो मिटाना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

जिनसे कभी दिल जुड़ता नहीं था 
आज वो दिल की धड़कन हैं 
दिल से तल्ख़ी का गुम जाना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

इतना क्यों मुश्किल होता है 
सोचता रहता हूँ अक्सर मैं 
सब को सबकुछ ही मिल पाना
हमने न जाना तुमने न जाना 

पहले तो दिल की छिडकन थी 
दोस्त थे पहले दो हमराही 
रिश्तों का ऐसे खिंच जाना 
हमने न जाना तुमने न जाना 

वक़्त है ये फिर भर जाएगा
दिल के ज़ख्मों को ख़ुद से
ऐसा ही कहता है ज़माना
हमने न जाना तुमने न जाना 


========= Rythm Reference ==========

Dum Dum Dum Dum Dum de da Dum Dum
Dum de da Dum Dum Dum de da Dum Dum 

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