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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Monday, February 19, 2024

चाहत

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कुछ इस तरह से उन्हें चाहिए
के ज़मीं आसमां को चाहिए
प्यार की शिद्दतें भी ऐसी हों (शिद्दत = intensity)
के जुबां बे-जुबां को चाहिए

किसी तारीफ की गरज़ तो नहीं
बस के तार्रुफ़ तो इक कराइये (तार्रुफ़ = introduction)
कोई पुकारे ना पुकारे उन्हें
नाम हर इक निशां को चाहिए 

हों इशारों से यार से बातें 
गीत एक ज़ाफ़रां सा गाइये (ज़ाफ़रां = saffron, केसर)
बात समझाना इक बहाना हो 
काम हर तर्जुमां को चाहिए (तर्जुमा = work of translation)

यूं ही होती हैं बात ग़ैरों से 
प्यार से बात कम ही होती है 
जब मुसाफ़िर वो बन के मिलते हैं 
दोस्त हर हम-जुबां को चाहिए (हम-जुबां = someone who speaks the same language)

चाहिए चाहतों के अफ़साने (अफ़साना = story)
मर्ज़ लेकिन जहाँ में और भी हैं (मर्ज़ = ailment, रोग)
कोई गलियों में कहता फिरता है 
एक छत बे-मकां को चाहिए (बे-मकां = homeless)

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