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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Monday, March 25, 2024

नहीं समझोगे

अब तो रहने दो मेरी बात तुम नहीं समझोगे 
मेरी बे-ढंग सोच है तुम नहीं समझोगे 
मैं बोलता ही जाऊँगा दीवानों की तरह 
जो सोच रखा है तुमने तुम वही समझोगे 

तुम नहीं समझोगे के क्यूँ तुम नहीं समझोगे 
ये बात सोचने की है ये नहीं समझोगे 
जो मैं कह दूँ के रहने दो मेरी बातों को 
तो मैं खुद में ही हूँ मग़रूर यही समझोगे 

ये समझ दिल की है दिमाग़ से ना समझोगे 
है सोच के परे की बात नहीं समझोगे 
जो आँख मूँद लो दिमाग़ को खाली कर दो 
तब जो समझोगे तो समझो के सही समझोगे 

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