और बता क्या ख़बर है तेरी
आज कैसे याद आ गई मेरी
तुम तो मसरूफ़ थे अपनी राहों पे
आज क्यूँ राह मुड़ गई तेरी
जबसे मंज़िलें तेरे ख्वाबों में हैं
और बुलंदी तेरे इरादों में हैं
नज़र तूने इधर नहीं फेरी
तो आज कैसे याद आ गई मेरी
कोई काम निकल आया होगा तेरा
वरना वक़्त तो काफी ज़ाया होगा तेरा
कहीं तुझे हो तो नहीं रही देरी
वैसे कैसे याद आ गई मेरी
अब आये हो तो ज़रा सुकून कर लो
ताज़ी सी कुछ साँसें ही भर लो
सफ़र में बोहोत काम आएँगी तेरी
और बता क्या ख़बर है तेरी

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