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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Thursday, May 16, 2024

दुनिया

तेरे लफ़्ज़ों में मेरी बात छुपी रहती है 
मैं ही कहता हूँ समझ जब भी तू कुछ कहती है  
मैं कहाँ रहता हूँ मुझको तो कुछ खबर ही नहीं 
तू सदा से ही मगर मेरे दिल मे रहती है 

तुझे जाना है तो जा किसने तुझको रोका है 
तेरा जाना मेरी आँखों के लिए धोखा है 
मैं हूँ सागर तेरा उलफ़त मे इंतज़ार करूं 
तू किसी दरिया सी बस मेरे तरफ बहती है

तू सदा से ही मगर

मुड़ के ना देख देख मुड़ के जिसने देखा है 
वो कभी बढ़ ना सके किसने उनको देखा है 
हर घड़ी कोसने की आदतें हैं दुनिया की 
छोड़ दुनिया की बात दुनिया कुछ भी कहती है 

तू सदा से ही मगर

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