तेरे लफ़्ज़ों में मेरी बात छुपी रहती है
मैं ही कहता हूँ समझ जब भी तू कुछ कहती है
मैं कहाँ रहता हूँ मुझको तो कुछ खबर ही नहीं
तू सदा से ही मगर मेरे दिल मे रहती है
तुझे जाना है तो जा किसने तुझको रोका है
तेरा जाना मेरी आँखों के लिए धोखा है
मैं हूँ सागर तेरा उलफ़त मे इंतज़ार करूं
तू किसी दरिया सी बस मेरे तरफ बहती है
तू सदा से ही मगर
मुड़ के ना देख देख मुड़ के जिसने देखा है
वो कभी बढ़ ना सके किसने उनको देखा है
हर घड़ी कोसने की आदतें हैं दुनिया की
छोड़ दुनिया की बात दुनिया कुछ भी कहती है
तू सदा से ही मगर

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