About Me

My photo
I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Friday, August 23, 2024

कमाई

ये नाटक है जो दुनिया का 
नाटक ये बनाया है रब ने 
मेरे किरदार को दुनिया से 
आवाज़ लगाई थी सबने 

जब मिट्टी में साँसें आई 
और धड़कन की लहरें छाई 
एक नाम दिया था दुनिया नें  
फिर काना फ़ूसी की सबने 

कुछ देखा था तो सीख लिया 
जो घबराया तो चीख लिया 
मासूम था जब मैं बचपन में 
तो खूब नुमाइश की सबने 

नादानी को जब छोड़ दिया 
रस्ते को अपने मोड़ लिया 
हम पल दो पल के आशिक़ थे 
ये बात सुनाई थी सबने 

नाटक है सब इस नाटक में 
सब नाटक ही तो करते हैं 
डरते तो हैं अँधियारों से 
पर रात ग़ुज़ारी है सबने 

ऐसे जब रात वो गुज़र गई 
रोशन तब नूर बुलाता था 
आराम से हम बस लेटे थे 
और सेज सजाई थी सबने 

घंटे दो घंटे बातें की 
सच्ची झूटी जैसी तैसी 
मिट्टी ने कमाई जो शोहरत 
मिट्टी में मिला दी थी सबने 

No comments:

Post a Comment

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...