ये नाटक है जो दुनिया का
नाटक ये बनाया है रब ने
मेरे किरदार को दुनिया से
आवाज़ लगाई थी सबने
जब मिट्टी में साँसें आई
और धड़कन की लहरें छाई
एक नाम दिया था दुनिया नें
फिर काना फ़ूसी की सबने
कुछ देखा था तो सीख लिया
जो घबराया तो चीख लिया
मासूम था जब मैं बचपन में
तो खूब नुमाइश की सबने
नादानी को जब छोड़ दिया
रस्ते को अपने मोड़ लिया
हम पल दो पल के आशिक़ थे
ये बात सुनाई थी सबने
नाटक है सब इस नाटक में
सब नाटक ही तो करते हैं
डरते तो हैं अँधियारों से
पर रात ग़ुज़ारी है सबने
ऐसे जब रात वो गुज़र गई
रोशन तब नूर बुलाता था
आराम से हम बस लेटे थे
और सेज सजाई थी सबने
घंटे दो घंटे बातें की
सच्ची झूटी जैसी तैसी
मिट्टी ने कमाई जो शोहरत
मिट्टी में मिला दी थी सबने

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