जानी अनजानी सि नज़रों से यूँ गुज़रता रहा
शख्सियत अपनी बनाने को मैं बिखरता रहा
कैसे करता मैं सवाबों की बात उनसे भला
शख्स हर एक यहाँ मैं मेरा ही करता रहा
[सवाब = charity]
सोचता हूँ मुझे शहरों में ज़िन्दगी क्या मिली
जीते रहने की वक़ालत में रोज़ मरता रहा
मुझको माज़ी की कोई बात याद आई तो मैं
रास्तों पे कभी चलता कभी ठहरता रहा
[माज़ी = past]
ज़िन्दगी की बड़ी उलझन को भूल कर वो ग़ज़ल
उम्र भर मौत से दिन रात बात करता रहा
[ग़ज़ल = Deer stuck in the bush]
सांस लेकर ग़मों को पी गया था मैं तो कभी
छोड़ कर सांस ग़मों से मैं फिर उबरता रहा
घर कि उम्मीद सभाले हदें वतन कि कहो
कशमकश में पड़ा उर्दू खुदी से लड़ता रहा
[उर्दू = army camp]

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