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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, November 6, 2024

उर्दू

जानी अनजानी सि नज़रों से यूँ गुज़रता रहा 

शख्सियत अपनी बनाने को मैं बिखरता रहा 

कैसे करता मैं सवाबों की बात उनसे भला 

शख्स हर एक यहाँ मैं मेरा ही करता रहा 

[सवाब = charity]


सोचता हूँ मुझे शहरों में ज़िन्दगी क्या मिली 

जीते रहने की वक़ालत में रोज़ मरता रहा 


मुझको माज़ी की कोई बात याद आई तो मैं 

रास्तों पे कभी चलता कभी ठहरता रहा 

[माज़ी = past]


ज़िन्दगी की बड़ी उलझन को भूल कर वो ग़ज़ल 

उम्र भर मौत से दिन रात बात करता रहा 

[ग़ज़ल = Deer stuck in the bush]


सांस लेकर ग़मों को पी गया था मैं तो कभी 

छोड़ कर सांस ग़मों से मैं फिर उबरता रहा 


घर कि उम्मीद सभाले हदें वतन कि कहो 

कशमकश में पड़ा उर्दू खुदी से लड़ता रहा 

[उर्दू = army camp]

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