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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, December 3, 2024

पुराना

Bahr: 1222-1222-122


मेरा कहना अभी खलता नहीं है
कोई मुझसे यहां जलता नहीं है
किसी से कल कोई ये कह रहा था
पुराना नोट अब चलता नहीं है

ये किन राहों पे है निकला ज़माना
के सूरज शाम को ढलता नहीं है

ये कैसा आदमी बेदर्द है के
लगी है चोट पर मलता नहीं है

पुराना ही तो कहलायेगा मुझसा
हवा के साथ जो चलता नहीं है

मगर अब तक नहीं बदला वो ये के
कभी दिन मौत का टलता नहीं है

दफ़न होकर जिसम पिघला तो है पर
न जाने क्यूँ ये दिल गलता नहीं है

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