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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, January 8, 2025

आबशार

ग़म दिल में हूँ हवाओं के बे-क़रार में हूँ

या कहो जान तमन्ना मैं तेरे प्यार में हूँ


ये तिरा साथ जो मिल जाए तो शिफ़ा ही मिले

यूँ मचलकर के मैं उड़ने के इंतज़ार में हूँ

[शिफ़ा = रोग से मुक्ति]


है किसे फ़िक्र ज़माने की बात कौन सुने

तिरे होठों से ये कह दो मैं एतबार में हूँ

[एतबार = trust]


ये भवें तेरी नज़र तेरी तेरी चाल बला

है ख़ुदा पहले मगर मैं भी हुस्न कार में हूँ

[हुस्न कार = creator of the beauty]


ये तो 'ज़ाहिर' है के ज़िंदा हूँ आस पे ही तेरी

आजकल शामों सहर तेरे रोज़गार में हूँ


मैं तो तेरे ही पिघलते से इंतज़ार में हूँ

ले मुझे जीत मुसलसल मैं अपनी हार में हूँ


है मुझे तिश्नगी क्या जाने किस जनम की जज़ा

के जनम ले के तिरे बार-ओ-आबशार में हूँ

[तिश्नगी = तपन, जज़ा = बदला, बार = rain, आबशार = झरना]

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