असली शायर: अल्लामा इक़बाल
निगाहों परे आसमाँ और भी हैं
यहीं इक नहीं आशियाँ और भी हैं
है सर पे फ़लक हैं फ़लक पे सितारे
सितारों के आगे जहाँ और भी हैं
नहीं तू सही, तू नहीं इक सहारा
मेरे हुस्न के कद्रदाँ और भी हैं
किसी इक ज़बाँ की नहीं मिल्कियत तू
मोहब्बत तेरे हम ज़ुबाँ और भी हैं
गुनाहों की बातें ज़रा रुक के सुनना
मेरे दोस्तों के बयाँ और भी हैं
है फ़ेहरिस्त लंबी यही बस नहीं है
मेरे नाम पे ग़लतियाँ और भी हैं
क्या 'ज़ाहिर' सभी अश्क़ तुझपे लूटा दूँ
अभी तुम चलो बे कुआँ और भी हैं
ख़ुशी मत मनाना अगर बैठ जाऊँ
मेरे पास तीर-ओ-कमाँ और भी हैं

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