आदमी ज़ोफ़-ए-तन देख सकता नहीं
रश्क अह्ल-ए-सुख़न देख सकता नहीं
है अना वो बला सर पे चढ़ जाये तो
पैरहन पैरहन देख सकता नहीं
[ज़ोफ़-ए-तन = weakness of body, रश्क = jealousy, अह्ल-ए-सुख़न = poet, अना = ego, पैरहन = clothes]
देखते हैं सभी आईना पर कोई
आइने की घुटन देख सकता नहीं
जो मुझे दिख रहा है यहाँ से अभी
कोई ये अंजुमन देख सकता नहीं
[अंजुमन = नज़ारा]
अब्र ने चाँद को ढँक लिया अब कोई
चाँदनी की किरन देख सकता नहीं
[अब्र = बादल]
जो भी है बुत कदा और है ना ख़ुदा
वो मेरा फ़िक्र-ओ-फ़न देख सकता नहीं
[बुत कदा = जिसे सब कुछ पता हो, ना ख़ुदा = नास्तिक, फ़िक्र-ओ-फ़न = विचारों की कलाकारी]
जब से अपनों ने है मुझको रूखसत किया
मैं ये अपना बदन देख सकता नहीं
[ज़मीं-दोस्त = ज़मीन में गाड़ देना]
आइने को न जाने गुमा क्या हुआ
के वो मेरा दहन देख सकता नहीं
[गुमा = अहंकार]
मैंने पड़ने न दी अपने सर पे शिकन
अब कफ़न पे शिकन देख सकता नहीं
वाइज़ों ने सुनाई थी जो दास्ताँ
मैं वो 'ज़ाहिर' अदन देख सकता नहीं
[वाइज़ = उपदेश देने वाला, रश्क-ए-अदन = beautifully perfect]
मैं दराज़ों का शायर नहीं हूँ मुड़े
काग़ज़ों पे सुख़न देख सकता नहीं
[सुख़न = कविता]

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