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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, February 5, 2025

टहनी

बात कहने को बात कहनी थी
जो अनकही थी दिल में रहनी थी

बोझ कैसे उतरता दिल का भला
दिल कि बातें न थी वो ज़हनी थी

गिर गई वो चलो अच्छा ही हुआ
वो इमारत कभी तो ढहनी थी

ख़ुद को अब भी मेरा बताने को
उसने मेरी ही शाल पहनी थी

जाने कैसे हुआ पलट क्यूँ गई
जो हवा मेरी ओर बहनी थी

उससे वा बस्त होके 'ज़ाहिर' था
तंज़ ओ फ़िक्रों की बात सहनी थी

फूल तूफ़ान आ के लेके गया
बच गई सिर्फ़ एक टहनी थी

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