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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Tuesday, February 20, 2024

गरज़ क्या है

मोहब्बत चीज़ क्या है 
और ये करने की गरज़ क्या है 
पूछते हैं हमें जीते जी 
मरने की गरज़ क्या है?

हम उनको बोलते हैं 
बर्फ से पानी निकलता है 
अगर पानी से जीना है 
तो झरने की गरज़ क्या है?

हमें मरना तो है इक दिन 
ये सच है और मुनासिब है 
तुझे गाड़ी गुजरने पे 
ठहरने की गरज़ क्या है?

कोई बैठा है तेरे घर 
तुझे वो याद करता है 
अकेला तू वो तनहा है 
तो डरने की गरज़ क्या है?

ये चुप्पी बोलती है साफ़ 
बातें ये बराबर हैं 
मेरी बातें जो सच्ची हैं 
तो लड़ने की गरज़ क्या है?

Monday, February 19, 2024

ताहिर - Crime Tak

जुर्म कितने ही मैं बताऊँ तुम्हें 
कोई नहीं न जो बिका होगा 
कोई रिश्ते नहीं बचे ताहिर 
जुर्म जिसमें न हो सका होगा 

कौन टिकता है उम्र भर के लिए 
न वो ज़मी न वो मकां होगा 
इतना दुखता है छोड़ दे उसको 
वो भी शायद बिखर चुका होगा 

प्यार की बात भी फरेबी थी 
सबने सोचा के वो थका होगा 
उसने शरबत में तल्ख़ घोली थी 
क्या पता था के यूँ दग़ा होगा 


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ये शेर मैंने शम्स ताहिर खान जी की खिदमत में लिखे हैं |
अगर अच्छा लगे तो इल्तेजा है इसे पढ़ कर मुझे नवाज़ दें। 
ज़र्रा नवाज़ी होगी। 

चाहत

demo

कुछ इस तरह से उन्हें चाहिए
के ज़मीं आसमां को चाहिए
प्यार की शिद्दतें भी ऐसी हों (शिद्दत = intensity)
के जुबां बे-जुबां को चाहिए

किसी तारीफ की गरज़ तो नहीं
बस के तार्रुफ़ तो इक कराइये (तार्रुफ़ = introduction)
कोई पुकारे ना पुकारे उन्हें
नाम हर इक निशां को चाहिए 

हों इशारों से यार से बातें 
गीत एक ज़ाफ़रां सा गाइये (ज़ाफ़रां = saffron, केसर)
बात समझाना इक बहाना हो 
काम हर तर्जुमां को चाहिए (तर्जुमा = work of translation)

यूं ही होती हैं बात ग़ैरों से 
प्यार से बात कम ही होती है 
जब मुसाफ़िर वो बन के मिलते हैं 
दोस्त हर हम-जुबां को चाहिए (हम-जुबां = someone who speaks the same language)

चाहिए चाहतों के अफ़साने (अफ़साना = story)
मर्ज़ लेकिन जहाँ में और भी हैं (मर्ज़ = ailment, रोग)
कोई गलियों में कहता फिरता है 
एक छत बे-मकां को चाहिए (बे-मकां = homeless)

Saturday, February 17, 2024

क़ता - लापता

demo

सितारों से पूछा था इक दिन किसी ने 
के क्यूँ आसमानों में यूँ तैरते हो 
सितारों ने पूछा उसे ही पलट कर 
ज़मीं पे हो फिर भी ये क्या घूरते हो?

किसी से भी पूछो तमन्नाएँ दिल की (तमन्ना = desire)
किसी से भी पूछो के क्या चाहते हो 
किसी को नहीं है पता ख़ुद की ख़्वाहिश (ख़्वाहिश = will)
बताएँगे वो जो सभी चाहते हों 

ये जन्नत की हूरें ये दोज़ख़ की बातें (दोज़ख़ = hell)
किन्हें क्या मिला है किसे ये पता है
जो दो प्यार के बोल कहता हो तुमसे
उसे ही इलम है वही जानता है (इल्म = knowledge)

है तस्वीर तेरी मेरे आईने में 
ये क्या गुफ़्तगू है ये क्या माजरा है (गुफ़्तगू = conversation)
ये पूछूँ मैं तुमसे जो दे दो इजाज़त
के ऐसा मेरा तुझसे क्या राब्ता है 

भटकते हैं हम-तुम यूँ ही इस जहाँ में 
न तेरी ख़ता है न मेरी ख़ता है (ख़ता = fault)
हमें हिक़मतों का सबक़ देने वाले (हिक़मत = ज्ञान, wisdom)
न जाने किधर हैं कहाँ लापता हैं 



कोहिनूर

हुस्न तेरा ये कोहिनूरी है 
अब्र की शिद्दतें भी पूरी हैं .... (अब्र = बादल, शिद्दत  = intensity)
दिल संभाले तो कोई कैसे बता 
कुछ तो कहना तुझे ज़रूरी है 

ये चमक है तेरा सुरूर-ए-नशा  .... (सुरूर = toxic)
आँख तेरी ये चश्म-ए-नूरी है  .... (चश्म-ए-नूरी = प्रकाश सी नज़र )
देख अपनी नज़र को देख ज़रा
देख इनको ये भूरी भूरी हैं

मुस्कराहट से काम चलता है 
रुख़ पे तेरे हंसी अधूरी है (रुख़ = चेहरा)
मिलने आये हो कुछ तो बात करो 
बात करना भी तो ज़रूरी है  

कुछ भी करवा ले आज तेरा शबाब 
आज की रात भी सिन्दूरी है 
इम्तेहां लोगे कोई बात नहीं 
हाथ कंगन को कितनी दूरी है 

बात की बात भूलने वाले 
झूठ इतना भी क्या ज़रूरी है 
बक़्श दो अर्ज़ मेरे शेरों को 
मेरी ग़ज़ल अभी अधूरी है 

Friday, February 16, 2024

मुहब्बत

अमीरों के जलवे, हसीनों की शोखी 
जवानी की शान-ए-रियासत बड़ी है 
अगर मुझसे पूछो, के क्या देखते हो 
नज़र में मेरी तो नज़ाक़त बड़ी है 

है मज़बूत बाज़ू , है मॅहदूद दिल भी
               ..... (मॅहदूद = बड़ा, असीम)

ये माना के तेरी ये ताक़त बड़ी है
नहीं चाहिए और कुछ दोस्ती में
मेरे दोस्त बस तेरी सोहबत बड़ी है 

हो तिफ्लों का बढ़ना, या पौधों का बचना
                          ..... (तिफ्ल = बच्चे)
सभी को पता है के मेहनत बड़ी है
मगर फल मिले तो हो सीना बराबर
अगर ना मिले तब तो ज़ेहमत बड़ी है 
                        ..... (ज़ेहमत = कष्ट)

मनाही अगर हो किसी बात की तो
वही बात करने में राहत बड़ी है
इबादत बड़ी या ज़ियारत बड़ी है
        ..... (इबादत = पूजा, ज़ियारत = तीर्थ स्थल )
मेरी बात मानो मुहब्बत बड़ी है


Thursday, February 15, 2024

आदत

demo

दिल की ये धड़कन इबादत सी है 
और तेरी मुरादें इनायत सी है 
ज़िंदा तो वैसे भी रह लेते हम 
पर दिल को धड़कने की आदत सी है 

बातें करूँ दिन की रातें करूँ 
मेरा बस चले तो मैं क्या न करूँ 
लगता है कोई विरासत सी है 
यूँ के दिल को धड़कने की आदत सी है 

मुझे महफिलों की तो ख्वाहिश नहीं 
महफिलों के ख़ुदा की नवाज़िश नहीं 
तू जो नहीं तो हरारत सी है 
मेरे दिल को धड़कने की आदत सी है 

तू नहीं कुछ नहीं ऐसा भी तो नहीं 
आज तू न सही तेरी यादें सही 
दिल में मेरे तू हिफाज़त सी है 
इस दिल को धड़कने की आदत सी है 

देख बेचैनी है शाम से ही मुझे 
एक पैग़ाम भेजा है मैंने तुझे 
दिल में कसक सी शरारत सी है 
यूँ ही दिल को धड़कने की आदत सी है 

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...