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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Monday, March 4, 2024

गुमाँ

उड़ने की बातें करते हो 
और चलने से भी डरते हो 
बदलोगे हाथों की लकीरें 
तुम कैसी बातें करते हो 

इक से हैं तुम और मैं कितने 
फ़र्क़ मगर ये क्यूँ करते हो 

मेरा क़द है तुझसे बेहतर 
बच्चों सी बातें करते हो 

साँसों का ये तुझमे चलना 
इसमें तुम खुद क्या करते हो 

ख़ुद देते हो ख़ुद की मिसालें 
किससे सब समझा करते हो 

खाना पीना जीना मरना 
इसके अलावा क्या करते हो 

दुनिया चलेगी तुम ना रहोगे 
इतना गुमाँ फिर क्यों करते हो 

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