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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, March 6, 2024

आवारगी

याद आती जो तेरी तुझसे मिलने आ जाता 
तुम मेरे साथ ही रहते हो तो क्या याद करूँ 
भूल जाने की कोई बात कहाँ बनती है 
याद आते नहीं क्या ये बड़ा सुबूत नहीं 

बात बनती है बनाता हूँ जहां तक हो सके 
मेरी फितरत ही ऐसी है तो मैं क्या ही करूँ 
वैसे चुप रहता हूँ कहता हूँ मैं तो कुछ भी नहीं 
मुझको छेड़ोगे कहने को तो पछताओगे 

मुझे न क़ैद करो मैं कोई परिंदा नहीं 
खुली हवा में साँसों की मुझको आदत है 
बात कहने की हो या फिर हो बात सुनने की 
कोई ना पेश हो सलीके से तो दम घुटता है 

बड़े बेचैन हो रहे हो क्या बात है दोस्त 
तू कलम में भी अगर है तो कोई बात नहीं 
तू अगर चाहे लिख दूँगा तुझे पढूंगा नहीं 
कोई पूछेगा तो कह दूंगा मैं हूँ आवारा  

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