कोई कहीं कभी किसी जघा तनहा
मेरे ख्यालों से भी होकर गुज़रेगा
जिसे मैं देख ही नहीं सकता हूँ अभी
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा
ये दिल से आवाज़ें आती हैं इतनी मेरे
के इनको चाहूँ तो भी झूठा कैसे कहूँ
कोई कशिश तो आकर पास मेरे
है कानों में क्या कहती है ये किससे कहूँ
मैं उसका हाथ प्यार से जो हाथ में लूँ
मुझे यक़ीन है कभी न वो छोड़ेगा
जिसे मैं देख भी नहीं सकता हूँ अभी
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा
चले आओ चले आओ
मुझे ऐसे न तड़पाओ
यूँ धड़कन में धड़क कर तुम
रग़ों में ही समा जाओ
ये इल्तेजा है बेचारे इस दिल की मेरे
कभी तो बात मेरी भी वो सुन लेगा
जिसे मैं देख भी नहीं सकता हूँ अभी
देख लेना वो ख़ाबों से ही उतरेगा
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