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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Saturday, March 9, 2024

सागर

लहरों की तरह जज़्बात भी होते हैं 
गिरते उठते हँसते और रोते हैं 
जीवन की मंज़िल मौत के धागे से 
जुड़कर फिर से जीवन ही होते हैं 

हर मौज में इतना शोर के सन्नाटे 
आराम से गहराई में सोते हैं 

कुछ कहती है हर बूँद ये जीवन की 
कुछ शख्स यहाँ पहचान के होते हैं 

आवाज़ नहीं होती गहराई में 
ऐसे ही तो वाक़िफ़ भी होते हैं 

दीखता तो नहीं है कुछ भी पानी में 
जाईके में नमकीन से होते हैं 

बुनियाद की अज़मत इतनी होती है 
इसके जानिब दुःख खुद भी रोते हैं  

हम तुम आकर जीवन के सागर में 
मोती की तरह किरदार पिरोते हैं 

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