ये पूछते हैं लोग कैसे ज़िंदा हूँ मैं
साँसे नहीं रही तो कैसे ज़िंदा हूँ मैं
ये मानता हूँ जिस्म में साँसे नहीं रही
ज़ेहनों में दोस्तों के वैसे ज़िंदा हूँ मैं
कह डालो जनाज़े में मेरे कुछ भी मगर
अंदाज़ ऐसे रखना जैसे ज़िंदा हूँ मैं
इतना भी मेरी मैय्यत पे दुःख ना करो यार
के मुझको लगे जैसे तैसे ज़िंदा हूँ मैं
तरकीब ये लगाई थी शेरों की शक्ल में
लिख डाले हैं ख़याल ऐसे ज़िंदा हूँ मैं

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