फिर वही ज़िंदगी फिर मौत का ये फेरा है
गुम न हो जाना यहाँ पर बोहोत अंधेरा है
चाँद तारे भी बंट गए हैं लोग कहते हैं
वो तारा तेरा है और ये चाँद मेरा है
मेरे दर पर मेरे नाम की तख्ती जो मिली
वो समझ बैठा यहीं पर मेरा बसेरा है
इल्म तो उसको भी ये होगा कभी न कभी
रात के बाद सामने, खड़ा सवेरा है
देख आँखों में चमकते हैं रंग मिट्टी के
कोई है लाल, कोई हरा, कोई सुनहरा है
ढेर मिट्टी के जमा कर भी लो, क्या पाओगे
सख्त है वक़्त ये कमबख्त बड़ा लुटेरा है
कोई साथी नहीं होता जो तेरे साथ चले
सभी रह जाएंगे कोई भी नहीं तेरा है
खुल ही जाती है एक दिन यहाँ सबकी मुट्ठी
कुछ न तेरा है यहाँ और कुछ न मेरा है

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