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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Thursday, April 11, 2024

फ़रिश्ता

कभी कभी बग़ैर बात के मचलता है 
बोहोत मुश्किलों से दिल मेरा संभालता है 
बस इक दवा है मेरे पास ताज़गी के लिए 
ख़याल लिख के कलामों से दिल बहलता है 

उम्मीद रखना है फ़ुज़ूल ये हक़ीक़त है 
कहाँ किसी के लिए कोई भी बदलता है 
कभी तो घूँट भर का खून पी के देख ज़रा 
के कोई कैसे ज़ख्म अपने ही निगलता है 

यूँ गोल गोल सी बातों से मुझे ख़ुश न करो 
वो और होंगे जिन्हें सच में झूठ चलता है 
जला के रौशनी करोगे? मैं चराग़ नहीं 
मगर छुए जो मुझे अपने हाथ मलता है 

ये वक़्त झूठ है झूठी ये सब कहानी है 
ये चाँद झूठ मूठ डूबता निकलता है 
वो आसमाँ में सितारों का टूटना देखे 
एक बच्चा ख़ुशी से नाचता उछलता है 

ये जिस्म गर्म है अभी, अभी तो बात करो 
अभी तो मेरा हौसला भी उसे खलता है 
अभी न आएगा कोई भी ये पता है मुझे 
अभी तो मौत का फ़रिश्ता मुझसे डरता है 

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