कभी कभी बग़ैर बात के मचलता है
बोहोत मुश्किलों से दिल मेरा संभालता है
बस इक दवा है मेरे पास ताज़गी के लिए
ख़याल लिख के कलामों से दिल बहलता है
उम्मीद रखना है फ़ुज़ूल ये हक़ीक़त है
कहाँ किसी के लिए कोई भी बदलता है
कभी तो घूँट भर का खून पी के देख ज़रा
के कोई कैसे ज़ख्म अपने ही निगलता है
यूँ गोल गोल सी बातों से मुझे ख़ुश न करो
वो और होंगे जिन्हें सच में झूठ चलता है
जला के रौशनी करोगे? मैं चराग़ नहीं
मगर छुए जो मुझे अपने हाथ मलता है
ये वक़्त झूठ है झूठी ये सब कहानी है
ये चाँद झूठ मूठ डूबता निकलता है
वो आसमाँ में सितारों का टूटना देखे
एक बच्चा ख़ुशी से नाचता उछलता है
ये जिस्म गर्म है अभी, अभी तो बात करो
अभी तो मेरा हौसला भी उसे खलता है
अभी न आएगा कोई भी ये पता है मुझे
अभी तो मौत का फ़रिश्ता मुझसे डरता है

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