तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे
सब्र कर लेंगे क़यामत का और क़िस्मत का
तुझको ऍ दोस्त हम दोस्ती सिखा देंगे
राह में तेरी हम ऐसे मुंतज़िर होंगे
दिल को धड़कते ही रहने की हम सज़ा देंगे
आईना उम्र की दहलीज़ें जब दिखाएगा
घर से अपने हम हर आईना हटा देंगे
इस दफ़ा ना सही लेकिन ये तो होगा इक दिन
तुझको हर हाल मे हम बस अपना बना लेंगे
तेरी यादों को कुछ ऐसे हम छुपा लेंगे
तेरे ख़यालों से अपना रिश्ता निभा लेंगे
तू नहीं सामने तो भी ऐसा क्या बिगड़ता है
प्यास आँखों की आंसुओं से हम बुझा लेंगे

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