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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Monday, April 22, 2024

साक़ी

रिश्ते तमाम हैं पर मिलता कोई नहीं 
ग़लती से मिल भी जाए तो जुड़ता कोई नहीं 
दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं
[साक़ी = one who serves drinks / शराब पेश करने वाले]

रिश्तों की आस खून के क़तरों से कहाँ है 
दुनिया में वो भी ख़ुश हैं जिनका कोई नहीं 

कैसी ये चोट दी है क्या दिल का हाल है 
के ज़ख्म तो गहरा है निशाँ कोई नहीं 

कैसा ये शहर तेरा रहते कहाँ हैं लोग 
रस्ते तमाम हैं यहाँ मकां कोई नहीं 

दिल डूबता है लेकिन देखो ये बेबसी 
नज़दीक यहाँ मेरे तिनका कोई नहीं

इस शोर शराबे में किससे कहे कोई 
सब बोलते हैं अपनी सुनता कोई नहीं

दिल देके सबको देखा साक़ी तेरी तरह  
सबका ये हो चुका है इसका कोई नहीं

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