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I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, April 24, 2024

जो तू है वो मैं भी हूँ

जो ऊपर आसमाँ देखूं तो लगता है के पागल हूँ 
जो नीचे फर्श पे देखूं तो लगता है के घायल हूँ 
जो आँखें बंद कर बैठूं तो लगता है के कायर हूँ 
जो ख़ुद में झांकता हूँ तो 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 
समझता है के मैं तुम हूँ 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 

मैं पागल हूँ मैं घायल हूँ 
मैं कायर हूँ समझता हूँ 
मगर खुद को ये कहकर मैं 
तुझे बदनाम कैसे करूँ  
तुझे बदनाम कैसे करूँ 
तुझे बदनाम कैसे करूँ 

मैं अब से सोचता हूँ खुद से मिन्नत खुद ही करता हूँ 
मुझे जो चाहिए खुद मैं ही खुद से मांग सकता हूँ 
ये मुश्किल है के आसान है 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 
आज़मा कर ज़रा देखूं 

तुझे कोई नाम कैसे दूँ 
तुझे कोई रूप कैसे दूँ 
तुझे कैसे कहूँ कुछ भी 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ 
के जो तू है वो मैं भी हूँ  

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