About Me

My photo
I am a music, art, culture enthusiast and like to flow as the nature takes me. I write poetries and shayris. I use my Pen Name as 'Zaahir'. Zahir means 'Expression'. In some contextual sense it also means 'Obvious'.

Wednesday, April 3, 2024

मुख़्तलिफ़

दिल के मिजाज़ आज ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं 

जज़्बात के रवाँ भी ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं     

लगता है ज़ोर-ओ-शोर से बरसेंगे आज ये

बादल के रंग आज ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं 

[मिजाज़ = mood], [मुख़्तलिफ़ = different], [रवाँ = flow]


कहना है जो तुझे वही कहना है मुझको भी 

बस लहज़े तेरे और मेरे मुख़्तलिफ़ से हैं 
[
लहज़े = styles]


खुशियों से बह रहे हैं काशीदों की चौंधी में  

इन आँसुओं के ज़ाइक़े भी मुख़्तलिफ़ से हैं 

[अश्क़ = tears], [ज़ाइक़े = tastes]

कनखी से देखते हैं हमें वो पए-हम ही   

अन्दाज़ देखने के ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं

[कनखी = side glance,पए-हम = continuously]


2212 1211 2212 22


है तौर तर्ज और है आवाज़ बस अलग

अल्लाह और देव कहाँ मुख़्तलिफ़ से हैं?

[इबादत = prayer]


ये जश्न झूम झूम मनाएंगे हम मिल कर 

महफ़िल में आज साज़ ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं 

[साज़ = musical instruments]

वो पूछते हैं हमने कहाँ शब थी गुज़ारी 

कपड़ों के दाग़ आज ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं 


इक जान बँट गई है यहाँ आज़माइशी 

औ जिस्म जो दिये हैं ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं

[दरमियाँ = between]

उस्ताद ने कहा है मेरा सुनके ये कलाम 

इस बार शेर तेरे ज़रा मुख़्तलिफ़ से हैं 

[kalaam = poetry (in this case)]


No comments:

Post a Comment

ख़ामोशी

ख़ुश्क यादों का भँवर है ये मेरी  ख़ामोशी तल्ख़ लहजे का असर है ये मेरी  ख़ामोशी मैं जो ख़ामोश हूं सुन सकता हूं दुनिया तुझ को जज़्बा-ए-शौक़-ए-ज़बर ...