वो फिर याद आया मुझे सोते सोते
वो जो रह गया था मेरा होते होते
वो मोती की माला ज़रा सी बची थी
जो हाथों से छूटी पिरोते पिरोते
उसे मैंने पाकर तो जन्नत ही पा ली
खुली आँख मेरी मगर रोते रोते
तुझे याद है क्या अँधेरों मे चलना
खुशी से मचलना मुझे टोते टोते
गुलाबों के फूलों की सूखी किताबें
नहीं आँख थकती तुझे जोते जोते
ग़ज़ल नज़्म की तो लड़ी लग गई है
तसव्वुर तुम्हारा सँजोते सँजोते
जो टूटे पड़े थे बिखर के जमी पर
वो मोती उठाए सहर होते होते
वो जो रह गया था मेरा होते होते

No comments:
Post a Comment