जिन्हें चाहतें थी तेरी चाहतों की
तेरी हसरतों ने उन्हें मार डाला
तेरी ज़ुल्फ़ की उलझनों से जो निकले
निगाहों ने तेरी उन्हें मार डाल
तेरी खुशबू जैसा महकता है संदल
तेरे तन बदन का सुखन है निराला
जिन्हें तेरी आँखों ने देखा नहीं था
अदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला
तेरे सुर्ख होंठों पे लफ्जों के झरने
नहीं जिसने देखे अकल पे है ताला
तेरे मयकदे तक न जो आ सके हों
सदाओं ने तेरी उन्हें मार डाला

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